नयी दिल्ली , अगस्त 13 -- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान (एएमबी) के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के उद्देश्य से 12 और 13 अगस्त को यहाँ दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि इस कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 160 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज, युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा जनजातीय कार्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के अलावा विशेषज्ञ और विकास एवं कार्यान्वयन साझेदार भी शामिल हुए।
मंत्रालय की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एनीमिया की व्यापक समस्या से निपटने के लिए विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग, सेवा वितरण और समन्वित उपायों के जरिए एनीमिया की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सकता है। उन्होंने जन-जागरूकता बढ़ाने तथा जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए गर्भावस्था के बाद भी युवाओं को आयरन और अन्य आवश्यक पोषण संबंधी पूरक उपलब्ध कराने की जरूरत बतायी।
कार्यशाला में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नए डिजिटल एप्लिकेशन और पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया। यह प्लेटफॉर्म स्क्रीनिंग के जरिए पहचाने गये लाभार्थियों की डिजिटल ट्रैकिंग, उपचार और अनुपालन की निगरानी तथा समय पर फॉलो-अप में मदद करेगा। इसके माध्यम से देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करने के साथ उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकेगी, जहां अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने एनीमिया के प्रबंधन में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने समय पर जांच, एनीमिया की गंभीरता और कारण के अनुरूप उपचार तथा तीन महीने बाद दोबारा जांच की आवश्यकता बतायी।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने भी एनीमिया से निपटने के लिए बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने और आयरन, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों तथा आहार विविधता पर ध्यान देने की जरूरत बतायी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित