नयी दिल्ली , जून 15 -- नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) ने संगठन के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आंध्र प्रदेश और झारखंड में दो नये स्वतंत्र राज्य निदेशालय बनाए हैं।
एनसीसी महानिदेशालय मुख्यालय से मिली मंजूरी के बाद अब एनसीसी राज्य निदेशालयों की कुल संख्या 17 से बढ़कर 19 हो गयी है। संगठन का यह विस्तार दोनों राज्यों के कैडेटों और शैक्षणिक संस्थानों को एनसीसी से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए किया गया है।
सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अलग निदेशालय बनने से आपसी तालमेल बेहतर होगा, निगरानी आसान होगी और ट्रेनिंग व अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस फैसले से युवाओं को एनसीसी कार्यक्रमों से जुड़ने और ट्रेनिंग की अच्छी सुविधाएं मिलने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और देश सेवा की भावना विकसित करने के बड़े अवसर मिलेंगे।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें देश के युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर, सक्षम व जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करने पर जोर दिया गया है, ताकि वे देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।
अधिकारियों ने बताया कि इस नयी प्रशासनिक व्यवस्था से ज़मीनी स्तर पर एनसीसी की गतिविधियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। इससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और स्कूलों, कॉलेजों व कैडेटों के साथ सीधा संपर्क मजबूत होगा।
नेशनल कैडेट कोर अधिनियम, 1948 के तहत स्थापित एनसीसी की शुरुआत लगभग 20,000 कैडेटों के साथ हुई थी। आज यह दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन बन चुका है। वर्तमान में देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से जुड़े 20 लाख से अधिक कैडेट इसका हिस्सा हैं।
पिछले एक दशक में एनसीसी का तेजी से विस्तार हुआ है। साल 2014 से 2025 के बीच इसमें करीब छह लाख नए कैडेट जुड़े हैं। आज एनसीसी की उपस्थिति देश के 750 से अधिक जिलों में है। यह संगठन सैन्य प्रशिक्षण, साहसिक गतिविधियों, सामुदायिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के कामों के ज़रिए युवाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाला एनसीसी युवाओं में नेतृत्व, चरित्र, भाईचारा, अनुशासन और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का एक बड़ा मंच है। इसके कैडेट नियमित रूप से राष्ट्रीय एकता शिविरों, गणतंत्र दिवस शिविरों, सामाजिक सेवा परियोजनाओं, आपदा राहत कार्यों और विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
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