अगरतला , मई 18 -- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी ) ने दिल्ली में म्यांमार के ड्रग सरगना थानसिंटुआंग को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस गिरफ्तारी से भारत के पूर्वोत्तर और पड़ोसी देशों में सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट को करारा झटका लगा है।

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, सिंटुआंग अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क में एक बड़ा खिलाड़ी है, खासकर म्यांमार-मिजोरम-मणिपुर-असम-त्रिपुरा गलियारे में जहाँ वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेथामफेटामाइन और हेरोइन की आपूर्ति के लिए जाना जाता है। एनसीबी और अन्य ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों (डीएलईए ) द्वारा दर्ज कई एनडीपीएस मामलों में उसकी तलाश थी, जिनमें एनसीबी द्वारा दर्ज दो मामले भी शामिल हैं। वह म्यांमार-मिजोरम-त्रिपुरा/असम गलियारे से जुड़े सात एनडीपीएस मामलों में शामिल था और म्यांमार-मणिपुर-असम मार्ग से जुड़े पाँच अन्य मामलों में भी उस पर शक है। सिंटुआंग 2024 के एनसीबी अगरतला ज़ोन के एक मामले में मुख्य आरोपी था, जिसमें 14 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 2.8 किलोग्राम हेरोइन ज़ब्त की गई थी। इस मामले में उसे मिलाकर अब तक सात लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वह अगरतला क्षेत्र के एनसीबी द्वारा 2025 में दर्ज एक और मामले में मुख्य आरोपी था, जिसमें 49.1 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट ज़ब्त की गई थीं। इस मामले में उसे गिरफ़्तार करने से पहले ही नौ तस्करों को पकड़ा जा चुका था। जाँच के दौरान,एनसीबी ने इस गिरोह के कई सदस्यों और चिंटुआंग के करीबी साथियों की पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार किया था। इनमें वुंगखानथावना भी शामिल था, जो एक अहम सूत्रधार था और म्यांमार स्थित तस्करी नेटवर्क से जुड़ी नशीले पदार्थों की खेप की आवाजाही और आपूर्ति के तालमेल में उसकी बड़ी भूमिका थी। यह भी पता चला कि वुंगखानथावना मिज़ोरम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए एक अन्य एनडीपीएस मामले में भी शामिल था। नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी की गतिविधियों में लगातार शामिल रहने के कारण, उसके ख़िलाफ़ नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम (पीआईटीएनडीपीएस) अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गयी।

इस गिरोह से जुडे एक अहम हवाला सदस्य लालरामपारी को अगस्त 2024 में एनसीबी ने गिरफ़्तार किया। उस पर नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी से होने वाली कमाई को इधर-उधर करने (चैनलिंग) में शामिल होने का आरोप था। जाँच में पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़े लगभग 100 करोड़ रुपये के हवाला लेन-देन हुए थे, जिसके बाद इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) को सौंप दिया गया।

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