मुंबई , नवंबर 02 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के आंतरिक मतभेद उस समय खुलकर सामने आ गए जब पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार को दरकिनार करते हुए पार्टी के मंत्रियों सहित छह वरिष्ठ नेताओं ने नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बंद कमरे में बैठक की।

इस प्रतिनिधिमंडल में राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद प्रफुल्ल पटेल, और वरिष्ठ मंत्री दिलीप वालसे पाटिल, धनंजय मुंडे और हसन मुशरीफ शामिल थे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इन नेताओं ने श्री शाह के साथ मुलाकात में राकांपा और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित विलय के प्रति अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि पार्टी को अपना स्वतंत्र वजूद बनाये रखना चाहिए।

इन नेताओं ने वित्त और योजना विभाग के प्रभार को वापस एनसीपी को सौंपे जाने की भी मांग की। इस वर्ष की शुरुआत में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन विभागों की कमान अपने हाथ में ले ली थी।

श्रीमती सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय राजधानी के अलग दौरे के तुरंत बाद हुई इस बैठक ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच आपसी मतभेदों और एक समानांतर सत्ता केंद्र के उभरने की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

वरिष्ठ नेताओं से पर्याप्त सलाह-मशविरा किए बिना लिए जा रहे संगठनात्मक निर्णयों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। राकांपा की पारंपरिक पुणे स्नातक चुनाव क्षेत्र की सीट भाजपा को सौंपने के फैसले ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है।

इससे पहले श्री पटेल ने संगठन के भीतर आत्मविश्लेषण की मांग की थी, जबकि श्री भुजबल ने नए पार्टी प्रवक्ताओं की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए यह आरोप लगाया था कि वरिष्ठ मंत्रियों को विश्वास में नहीं लिया गया था।

इन घटनाक्रमों ने श्रीमती पवार के नेतृत्व और श्री पटेल, श्री तटकरे तथा श्री भुजबल जैसे दिग्गजों वाले वरिष्ठ नेतृत्व समूह के बीच बढ़ती खाई को जगजाहिर कर दिया है।

श्री शाह से हुई ताजा बैठक ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर राकांपा की आंतरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और उसके भविष्य के मार्ग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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