श्रीनगर , जून 13 -- राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चंडीगढ़ पीठ ने भारत की संप्रभुता, एकजुटता और सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के शोपियां स्थित 'सिराज-उल-उलूम वेलफेयर फाउंडेशन' के प्रबंधन को हटा दिया है।
एनसीएलटी ने संस्था को बेचने की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रोविजनल लिक्विडेटर नियुक्त किया है और इसकी सभी संपत्ति एवं बैंक खाते सीज कर दिये हैं। एनसीएलटी की चंडीगढ़ पीठ ने 11 जून को यह आदेश जारी किया। यह आदेश रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी), जम्मू और कश्मीर और लद्दाख की तरफ से कंपनीज अधिनियम की धाराओं 271 और 272 के तहत फाइल की गयी एक याचिका पर आया, जिसमें धारा 8 कंपनी को बंद करने की मांग की गयी थी।
न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि जम्मू- कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय से जुड़े आधिकारिक लिक्विडेटर आगे की कार्रवाई तक कंपनी के मामलों, संपत्ति, बैंक खाते, वित्तीय रिकॉर्ड और कागजातों का तुरंत शुल्क लें। न्यायाधिकरण ने कंपनी के निदेशक और अधिकारियों को 30 दिनों के अंदर संपत्ति और दायित्व का विस्तृत विवरण जमा करने का निर्देश दिया।
यह कार्रवाई जम्मू और कश्मीर प्रशासन के हाल ही में सिराज-उल-उलूम को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गैर-कानूनी संस्था घोषित करने के बाद हुई है, जिससे यह जम्मू और कश्मीर का पहला मदरसा बन गया है, जिस पर ऐसी कार्रवाई हुई है। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि संस्था ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेएआई) के साथ 'गुप्त संबंध' बनाये रखे, इसके अलावा उस पर गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों और कट्टरता के लिए माहौल बनाने का आरोप लगाया।
मदरसे पर प्रतिबंध लगने से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गये थे। सैकड़ों छात्र और माता-पिता संस्था को फिर से खोलने और पढ़ाई-लिखाई फिर से शुरू करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आये थे।
न्यायाधिकरण अब इस मामले की सुनवाई तीन जुलाई को करेगा।
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