न्यूयॉर्क , मई 23 -- परमाणु हथियार अप्रसार संधि (एनपीटी) का 2026 समीक्षा सम्मेलन शुक्रवार को न्यूयॉर्क में बिना अंतिम ठोस दस्तावेज अपनाए हुए समाप्त हो गया, जो सदस्य देशों के बीच आम सहमति प्राप्त करने में "पिछले 16 वर्षों में तीसरी विफलता" को दर्शाता है।
वार्ता विफल होने के बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर एनपीटी समीक्षा सम्मेलन का दुरुपयोग करके वास्तविकता को तोड़ मरोड़कर पेश करने और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में अपनी निरंतर विफलता और पश्चिम एशिया में एकमात्र परमाणु-सशस्त्र इज़रायल द्वारा उत्पन्न खतरे से वैश्विक ध्यान हटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
समीक्षा सम्मेलन के 11वें सत्र में ईरान की ओर से समापन भाषण देते हुए, ईरानी विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के महानिदेशक मोहम्मद हसनी-नेजाद पिरकुही ने कहा कि समझौते तक न पहुंच पाना वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है।
श्री पीरकुही ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रतिनिधियों से कहा कि वास्तव में, सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति की अनुपस्थिति में कोई भी चमत्कार नहीं कर सकता है।
ईरानी राजनयिक ने सम्मेलन प्रक्रिया की बार-बार विफलताओं के लिए देशों के एक विशिष्ट समूह को जिम्मेदार ठहराया और उन्हें संधि और पिछली समीक्षा सम्मेलनों के निर्णयों का प्राथमिक एवं सबसे महत्वपूर्ण उल्लंघनकर्ता करार दिया।
ईरान ने नाटो और औकुस के परमाणु-साझाकरण समझौतों की भी निंदा करते हुए कहा कि "तथाकथित परमाणु छत्र में शामिल देशों द्वारा अपने परमाणु शस्त्रागार को समाप्त करने से इनकार करना संधि के अंतर्गत उनके दायित्वों का स्पष्ट उल्लंघन है।"अपने भाषण के सबसे प्रभावशाली क्षणों में श्री पिरकुही ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़रायल ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में "मनचाहा आपराधिक युद्ध" नीतियां अपनाई हैं और दावा किया कि हमलों में ईरान की शांतिपूर्ण संरक्षित परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया है।
उन्होंने पश्चिमी देशों पर एनपीटी समीक्षा सम्मेलन का दुरुपयोग करके ऐसे गैरकानूनी हमलों को वैध ठहराने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। ईरानी प्रतिनिधि ने इज़रायल पर भी आरोप दोहराते हुए उसे रंगभेद शासन तथा क्षेत्र और उससे बाहर अस्थिरता, आक्रामकता एवं आतंकवाद का मुख्य स्रोत बताया।
इस बयान में ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच फरवरी 2026 में हुए संघर्ष के दौरान कथित रूप से मारे गए नागरिकों के बारे में भावुक संदर्भ भी शामिल थे। श्री पिरकुही ने कहा कि वह हमलों में मारे गए कई ईरानी बच्चों की याद में बोल रहे हैं, जिनमें "सात वर्षीय रेज़ा बरानी" और "12 वर्षीय महदिएह अहमदज़ादेह" भी शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि उनके तथाकथित सटीक हथियारों ने ठीक उसी जगह पर हमला किया जहां उनका इरादा था जिसमें अस्पताल, विश्वविद्यालय, अनुसंधान केंद्र, सांस्कृतिक विरासत स्थल, स्कूल, इस्पात और पेट्रोकेमिकल संयंत्र, आवासीय इलाके और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
सम्मेलन में गतिरोध ने एक बार फिर निरस्त्रीकरण प्रतिबद्धताओं, क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं और एनपीटी संरचना की विश्वसनीयता को लेकर परमाणु हथियार संपन्न देशों और गैर-परमाणु देशों के बीच गहरे मतभेदों को उजागर किया।
श्री पिरकुही ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि अंत में, सदन में दिए गए प्रस्ताव के संबंध में, ईरान रूस और चीन द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से सहमत है।
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