मुंबई , जुलाई 25 -- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने खारघर स्थित टाटा कैंसर अस्पताल के पीछे चल रही खदानों और स्टोन क्रशर गतिविधियों से मरीजों और अस्पताल को हो रहे नुकसान पर रायगढ़ के जिला कलेक्टर और संबंधित प्रशासन से जवाब मांगा है।
एनजीटी की पश्चिम क्षेत्र पीठ ने नोट किया कि 'कैंसर के उपचार, अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए उन्नत केंद्र' (एसीटीआरईसी), जिसे टाटा कैंसर अस्पताल के नाम से जाना जाता है - ने कहा है कि ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन से परिसर की इमारतों को नुकसान पहुंचता है। धूल के गुबार अक्सर तय सीमा से अधिक हो जाते हैं और सांस संबंधी खतरे पैदा करते हैं, खासकर उन मरीजों के लिए जो कीमोथेरेपी करवा रहे हैं।
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