शिमला , जुलाई 15 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सरवारी स्थित नेहरू पार्क के अंदर 'सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा' (एमआरएफ) की प्रस्तावित स्थापना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई यह कहते हुए टाल दी है कि यह मामला पहले से ही हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ अफरोज अहमद की अधिकरण की प्रधान पीठ, सार्वजनिक पार्क में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन सुविधा के खिलाफ संजय कपूर के मूल आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। आवेदक ने नेहरू पार्क के भीतर एमआरएफ की स्थापना पर आपत्ति जतायी थी।

इससे पहले आठ मई को अधिकरण ने इस मामले की जांच के लिए संयुक्त समिति का गठन किया था, जिसने 27 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट पर विचार करते हुए अधिकरण ने देखा कि यही मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, जहां आठ मई को पार्क के संबंध में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश पारित किया गया था।

अधिकरण ने उच्च न्यायालय की कार्यवाही का हवाला दिया, जिसमें यह दर्ज था कि कुल्लू शहर के बीचों-बीच लगभग पांच बीघे में फैले नेहरू पार्क में पहले कचरा डंपिंग और खराब रख-रखाव से जुड़ी समस्याएं देखी गयी थीं। वर्ष 2019 में दिये गये ज्ञापनों के बाद, पेवर ट्रैक बिछाने और वृक्षारोपण सहित नवीनीकरण के कार्य किये गये थे।

उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में पार्क के भीतर एमआरएफ शेड के निर्माण के प्रस्ताव को चुनौती दी गयी है और उस स्थल पर किये गये प्रारंभिक खुदाई कार्य का भी संदर्भ दिया गया है। सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका की नवीनतम स्थिति का पता लगाने के लिए सुनवाई स्थगित करने की मांग की। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता ने अधिकरण को सूचित किया कि रिट याचिका 13 जुलाई को उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की गयी थी।

उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही को देखते हुए, अधिकरण ने मामले को स्थगित कर दिया और इसे 16 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित