नैनीताल , जून 02 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने नैनीताल में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट कहा है कि नदी-नालों, प्राकृतिक जलधाराओं और नौलों को बचाना पहाड़ों के अस्तित्व और उनकी प्राकृतिक सुंदरता के लिए अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति अहमद ने चेतावनी दी कि पर्यावरण संरक्षण के बिना पहाड़ी क्षेत्रों का संतुलन बनाए रखना संभव नहीं होगा।

नैनीताल क्लब में आयोजित बैठक में न्यायमूर्ति अहमद ने नैनी झील संरक्षण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्थान का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए ताकि उसका असर नदियों, नालों और जल स्रोतों पर न पड़े। एनजीटी सदस्य ने नैनी झील में प्रदूषण रोकने, झील के चारों ओर ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने के लिए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन सीजन में बढ़ने वाले कचरे के प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने और शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

बैठक के दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने मंडल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रुद्रपुर के पुराने कूड़ा डंप का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा चुका है, जबकि नैनीताल में नए एसटीपी के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है और पुरानी सीवरेज लाइन के स्थान पर नई लाइन बिछाने के लिए 121 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।

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