भोपाल , अक्टूबर 26 -- मध्यप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, सरकारी आईटीआई के निजीकरण और पीएम श्री स्कूलों में शिक्षकों की कमी के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने सोमवार को प्रदर्शन कर शिक्षा व्यवस्था की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सोनी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मृतप्राय बना दिया है। उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के नाम पर केंद्र से 484 करोड़ रुपये का अनुदान मिलने के बावजूद प्रदेश में 2,200 से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को कक्षाओं में पढ़ाई के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हो रहे और वे यूट्यूब के माध्यम से पढ़ने को मजबूर हैं।
श्री सोनी ने सरकारी आईटीआई को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे पिछड़े और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा का निजीकरण बढ़ रहा है और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के विखंडन के फैसले से तकनीकी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
एनएसयूआई उपाध्यक्ष रेहान अहमद ने पीएम श्री स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती तत्काल करने, आईटीआई के निजीकरण और आरजीपीवी के विखंडन का निर्णय वापस लेने तथा शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की। संगठन के महासचिव तारिक खान ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने आईटीआई के निजीकरण पर तत्काल रोक नहीं लगाई तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी। प्रदर्शन में जिला महासचिव आदित्य कौरव, पीयूष पवार, अंकेश धाकड़, लवकुश गर्ग, आशु यादव, संस्कार प्रजापति, वेदांत कौरव, मयंक शर्मा सहित संगठन के अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
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