चंडीगढ़ , फरवरी 03 -- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा लीड एजेंसी तथा लोक निर्माण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से मंगलवार को चंडीगढ़ में सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण एवं सड़क अभियांत्रिकी प्रथाओं पर एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्र में सड़क सुरक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए कार्यरत वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, अभियंताओं, योजनाकारों तथा अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर पंजाब के लोक निर्माण विभाग मंत्री, श्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने राजमार्ग सुरक्षा एवं अभियांत्रिकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र और राज्य के प्रयासों के तालमेल पर ज़ोर दिया।

एनएचएआई, क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी श्री राकेश कुमार ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु एक समग्र, अभियांत्रिकी-आधारित रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राजमार्गों के डिज़ाइन में उभरती प्रवृत्तियों के अनुरूप मानव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, वैज्ञानिक योजना तथा दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

एनएचएआई मुख्यालय के सलाहकार (सड़क सुरक्षा) श्री सुदर्शन के. पोपली ने राजमार्गों के सुरक्षित अभियांत्रिकी डिज़ाइन से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी तथा यह स्पष्ट किया कि सुरक्षित सड़क अवसंरचना एवं अग्रसक्रिय सुरक्षा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

भारतीय सड़क कांग्रेस के सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एवं सदस्य श्री स्वतंत्र कुमार ने नवाचारी परावर्तक समाधानों के माध्यम से सड़क सुरक्षा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रभावी संकेतकों, उच्च दृश्यता वाली सड़क चिह्नांकन व्यवस्था तथा यातायात सुरक्षा उपकरणों (रोड फर्नीचर) की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो वाहन चालकों की जागरूकता एवं मार्गदर्शन को बेहतर बनाते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली की प्रोफेसर गीताम तिवारी ने 'रोड टू ट्रैफिक सेफ्टी 2030' विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने सड़क सुरक्षा में स्थायी सुधार हेतु दीर्घकालिक रणनीतियों एवं नीतिगत हस्तक्षेपों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए योजना, प्रवर्तन एवं अवसंरचना समाधानों के सुव्यवस्थित एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

सेव लाइफ फाउंडेशन के वरिष्ठ प्रबंधक श्री राहुल प्रकाश सिंह ने सुरक्षित राजमार्गों के लिए शून्य मृत्यु गलियारा संबंधी अभियांत्रिकी हस्तक्षेपों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने व्यावहारिक अध्ययन-उदाहरणों एवं प्रमाणित सुरक्षा उपायों को साझा किया। शून्य मृत्यु गलियारा की अवधारणा का उद्देश्य अभियांत्रिकी, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल एवं सामुदायिक सहभागिता के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम करना है। यह एक साक्ष्य-आधारित मॉडल है, जिसने उच्च जोखिम वाले मार्गों पर मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्शायी है।

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