तिरुवनंतपुरम , मई 20 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 11 केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों, महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों एवं अधिकारियों को 'परामर्श 2.0' जारी कर देशभर में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए त्वरित एवं व्यापक उपाय लागू करने का आग्रह किया है।

आयोग की 15 सितंबर, 2023 की सिफारिशों के विस्तार के रूप में जारी किये गये ये ताजा परामर्श जमीनी छानबीन, हितधारक परामर्श और एनएचआरसी की कार्यान्वन समीक्षाओं के बाद तैयार किये गये हैं।

आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नीति-निर्माण और कानूनी उपायों के बावजूद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामने मौजूद चुनौतियों को देखते हुए नयी सिफारिशें जरूरी हैं। यह परामर्श सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वन, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजी गयी है। इसके अलावा यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ साझा की गयी है।

आयोग ने पिछली सिफारिशों पर प्रशासन की सकारात्मक प्रतिक्रियों को संज्ञान में लिया। आयोग ने 2019 में लागू किये गये ट्रांसजेंडर पर्सन (अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम को संज्ञान में लिया, हालांकि आयोग ने यह भी कहा कि हितधारकों के साथ लगातार संपर्क से नीति-कार्यान्वन में कमी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासन, कानूनी अधिकार, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा में कई चिंताएं जाहिर हुई हैं।

आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को परामर्शी में दी गयी सिफारिशों को लागू करने और दो महीने के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने का निर्देश दिया है।

परामर्श 2.0 दस बड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें जेंडर-इनक्लूसिव सुधार, राष्ट्रीय डेटा प्रणाली में लैंगिक विविधता का समायोजन, समावेशी कानूनी ढांचा, संपत्ति का अधिकार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, कार्यस्थल पर समावेशन, शैक्षणिक अधिकार, इंटरसेक्स बच्चों की सुरक्षा, बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की भलाई और गरिमा गृह आश्रयों को मजबूत करना शामिल है। बड़ी सिफारिशों में, एनएचआरसी ने आने वाले भारत के जनगणना और दूसरे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में 'इंटरसेक्स', 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसवुमेन' जैसी अलग-अलग श्रेणियों को शामिल करने की मांग की ताकि सही और समावेशी आंकड़े सुनिश्चित हो सकें।

आयोग ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों जैसे कानूनों की समीक्षा करने की भी सिफारिश की, ताकि खुद से पहचाने गये जेंडर को मान्यता दी जा सके और ट्रांसजेंडर एवं इंटरसेक्स लोगों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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