नयी दिल्ली , फरवरी 19 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अपने नाम और लोगो के गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा दुरुपयोग का स्वतः संज्ञान लिया है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने आज बताया कि आयोग को देशभर के व्यक्तियों और एनजीओ से मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों की जांच करते हुए आयोग ने पाया है कि कई गैर-सरकारी संगठनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नाम से मिलते-जुलते भ्रामक नामों से अपना पंजीकरण करा लिया है।
उन्होंने कहा कि आयोग को "राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद (एनएचआरसी)" के रूप में पंजीकृत एक गैर-सरकारी संगठन के बारे में पता चला, जो कथित तौर पर 2022 में दिल्ली सरकार से पंजीकृत है। इसके प्रचार सामग्री में यह दावा किया गया है कि संगठन "नीति आयोग में पंजीकृत", "भारत के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में पंजीकृत", "भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत पंजीकृत" और "आंध्र प्रदेश मानवाधिकार परिषद संघ" से संबद्ध है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग ने पाया है कि अपनाया गया नाम और "अध्यक्ष" पदनाम भ्रामक है और भ्रम पैदा करता है। भ्रामक नामकरण से जनता को यह विश्वास होने लगता है कि ये संगठन या तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का हिस्सा हैं या फिर मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए आयोग द्वारा अधिकृत या मान्यता प्राप्त हैं।
उन्होंने कहा कि कि इस तरह के भ्रामक नामों का जारी रहना जनता के विश्वास को कम कर सकता है, जनादेश के दुरुपयोग, धन के संभावित गबन और सार्वजनिक अधिकारियों के लिए एनएचआरसी जैसे वैधानिक निकाय और गैर-सरकारी संगठनों के बीच अंतर करने में भ्रम पैदा कर सकता है।
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