हैदराबाद , सितंबर 14 -- एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा है कि देशभर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करना मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआरआर) प्रक्रिया से 100 गुना अधिक बुरा होगा।
एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'बेजा अहंकार' और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की क्रोनोलॉजी ने 2019 में सीएए/एनआरसी विरोधी आंदोलन को जन्म दिया था। उन्होंने सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब कहा था कि एनआरसी नहीं होगा। श्री ओवैसी ने कहा कि चल रही एसआईआर प्रक्रिया से आम लोगों, खासकर अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और प्रवासियों को पहले ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें दस्तावेजों के साथ सुनवाई के लिए पेश होना पड़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि एनआरसी '100 गुना अधिक बुरा' होगा और असम के अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर लोगों से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है और आरोप लगाया कि ऐसी प्रक्रिया नागरिकों को सरकारी अधिकारियों की दया पर छोड़ देगी।
श्री ओवैसी ने यूसीसी पर कहा कि विधि आयोग ने पहले कहा था कि समान नागरिक संहिता न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। उन्होंने तर्क दिया कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है और आरोप लगाया कि यूसीसी का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू पर्सनल लॉ थोपना होगा।
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