चेन्नई , मई 21 -- भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) , राष्ट्रीय क्षय रोग अनुसंधान संस्थान (एनआईआरटी), केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, और केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस), आयुष मंत्रालय के बीच टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य पाने के लिए यहां एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
गुरूवार को जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस एमओयू पर औपचारिक रूप से सीसीआरएस के महानिदेशक प्रो. डॉ. एन. जे. मुथुकुमार और आईसीएमआर-एनआईआरटी के निदेशक डॉ. श्रीनाथ सत्यनारायण ने हस्ताक्षर किए। यह रणनीतिक साझेदारी पारंपरिक सिद्धा चिकित्सा पद्धति के तहत नैदानिक परीक्षण, नई दवाओं के विकास, क्षमता निर्माण और पोषण संबंधी सहायता के ज़रिए टीबी के खिलाफ एकीकृत रणनीतियों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस एमओयू के बाद, 'टीबी मुक्त भारत अभियान-100 दिन का अभियान' के सिलसिले में 'भारत से टीबी खत्म करने में सिद्धा चिकित्सा पद्धति की संभावनाएँ' विषय पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। सीसीआरएस के अनुसंधान अधिकारी डॉ. ए. राजेंद्र कुमार ने आगामी स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. मुथुकुमार ने टीबी खत्म करने में सिद्धा चिकित्सा की संभावनाओं और क्षमता के साथ-साथ 'उच्च ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर आहार पूरक' पहलों के महत्व पर ज़ोर दिया।
डॉ. श्रीनाथ सत्यनारायण ने अपने विशेष संबोधन में टीबी के निदान, रोकथाम, पोषण संबंधी पूरक और इसके बाद फेंफड़ों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया।
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