हनुमानगढ़ , जून 06 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी उपखंड क्षेत्र में गांव राठीखेड़ा में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को लेकर पिछले दिनों हुए भारी विरोध, हिंसक प्रदर्शन और आगजनी की घटनाओं के बाद अब परियोजना की दिशा पूरी तरह बदल गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जहां सरकार और निजी कंपनी के बीच हुए करार को कंपनी ने स्वयं वापस ले लिया, वहीं अब उसी भूमि पर दो अत्याधुनिक सायलो स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
राठीखेड़ा में बड़ी क्षमता वाली एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव कुछ समय पहले सरकार और एक निजी कंपनी के बीच करार के रूप में सामने आया था। स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस परियोजना का कड़ा विरोध किया, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि फैक्ट्री से क्षेत्र की कृषि भूमि, भूजल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन तेज होते गये और कुछ दिनों पहले यह हिंसक रूप ले लिया।
प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री स्थल से जुड़ी संपत्तियों पर पथराव किया और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रशासन को भारी बल तैनात करना पड़ा। स्थानीय लोगों के भारी दबाव और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए निजी कंपनी ने स्वयं इस विवादास्पद प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला लिया और अपने कदम पीछे खींच लिये।
सूत्रों ने बताया कि अब विवादित भूमि पर अनाज भंडारण की आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर काम तेजी से शुरू हो गया है। प्रत्येक सायलो की भंडारण क्षमता 50 हजार टन होगी, यानी कुल एक लाख टन की संयुक्त क्षमता रहेगी। संबंधित विभागों और एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और निर्माण कार्य की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है।
आधुनिक सायलो तकनीकी रूप से उन्नत होंगे, जिनमें अनाज को वैज्ञानिक तरीके से भंडारित किया जाएगा। इससे अनाज की खराबी, नमी, कीटों और अन्य नुकसानों की संभावना काफी कम हो जाएगी। साथ ही भंडारण और परिवहन व्यवस्था भी अधिक सुगम और कुशल बन जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा किसानों को अपनी उपज के उचित मूल्य और सुरक्षित भंडारण का लाभ देगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि एथेनॉल फैक्ट्री के बजाय सायलो परियोजना क्षेत्र के लिए अधिक लाभकारी साबित होगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लंबे समय में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। योजना निर्धारित समय में पूरी हो गई तो राठीखेड़ा भविष्य में बड़े अनाज भंडारण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
एथेनॉल फैक्ट्री के विवाद ने एक बार फिर साबित किया कि विकास की योजनाएं स्थानीय भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ाई जाएं तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। राठीखेड़ा में सायलो परियोजना अब सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाती है।
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