अगरतला , मार्च 30 -- त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) में गुटबाजी से घिरी सत्तारूढ़ टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मन ने आशंका जताई कि अगर 12 अप्रैल को होने वाले एडीसी चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिलता है, तो वह संभावित समझौते को लेकर दिल्ली से संपर्क कर सकते हैं।
श्री किशोर ने स्पष्ट किया कि इस तरह का संवाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की ओर से नहीं, बल्कि सीधे दिल्ली के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से होगा। उनकी टिप्पणियों ने एडीसी के आगामी चुनावों पर राजनीतिक चर्चाओं में एक नया पहलू जोड़ दिया है। उन्होंने त्रिशंकु परिषद की स्थिति में चुनाव के बाद संभावित बातचीत और चुनावी परिणामों के आधार पर गठबंधन बदलने की संभावना का संकेत दिया है।
जहाँ भाजपा सूत्रों ने इसे चुनाव के बाद की परिस्थितियों का व्यावहारिक मूल्यांकन माना है, वहीं टिपरा मोथा ने इसे एक संकेत के रूप में देखा है कि पर्दे के पीछे की बातचीत और रणनीतिक कदम चुनावी नतीजों के बाद की स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
श्री किशोर ने 'दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व' से संवाद होने की बात पर जोर देकर त्रिपुरा के क्षेत्रीय चुनावी परिदृश्य पर राष्ट्रीय राजनीति के प्रभाव को उजागर किया है। इससे एडीसी में अंतिम सत्ता समीकरणों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
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