चेन्नई , सितंबर 05 -- नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने शनिवार को सेना में शामिल हुए नये अधिकारियों से अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव वाले हालात में काम करने की काबिलियत विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि मौजूदा समय में युद्ध का मैदान और तरीका पूरी तरह से बदल गया है। मौजूदा समय में युद्धक्षेत्र में जानकारी मिलने, फ़ैसला लेने और कार्रवाई करने के बीच का समय कम होता जा रहा है।

एडमिरल स्वामीनाथन ने यहां भारत के प्रमुख रक्षा प्रशिक्षण संस्थान, अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में 365 अफसर कैडेट्स (जिनमें मित्र देशों के 17 कैडेट्स भी शामिल थे) की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करते हुए कहा कि 1987 में जब वे एक युवा अधिकारी के तौर पर भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे, तब युद्ध का मैदान आज और आने वाले समय के मुकाबले काफी अलग है। युद्ध का तरीका बहुत बदल गया है। हथियार अब ज़्यादा दूर तक और अद्भुत सटीकता के साथ हमला करते हैं, सेंसर ज़्यादा साफ़ और गहरायी से देख सकते हैं, अभियान तेज़ी से और अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ होते हैं, और लड़ाई अब ऐसी तकनीकों से तय होती है जो पहले कभी नहीं सोची गयी थीं, इतनी उन्नत, सक्षम और बहुमुखी हैं।

नौसेना में शामिल होने के बाद पासिंग आउट कैडेट्स को जिन तीन वास्तविकताओं का सामना करना पड़ेगा और जो उनके काम के माहौल को तय करेंगी, उनके बारे में बात करते हुए उन्होंने कैडेट्स से कहा कि वे इनके लिए पहले से तैयार रहें। उन्होंने कहा, "पहली अनिश्चितता यह है कि हालात शायद ही कभी वैसे हों जैसा सोचा गया हो, और आपको मिलने वाली जानकारी अधूरी या अस्पष्ट हो सकती है। फिर भी, आप अधूरी जानकारी या पहले से बनी धारणाओं के आधार पर कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकते। आप यथास्थिति बनाए रखने वाले भी नहीं हो सकते। इसके लिए संयम, तैयारी, सही फ़ैसला लेने की क्षमता और ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के आत्मविश्वास की ज़रूरत होगी।"उन्होंने कहा, "संक्षेप में आपको अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव वाले हालात में काम करने की काबिलियत विकसित करनी होगी।"एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि दूसरी सच्चाई समय की कमी है। आज के युद्धक्षेत्र में जानकारी मिलने, फ़ैसला लेने और कार्रवाई करने के बीच का समय कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा, "आपको तेज़ी से जानकारी समझनी होगी, तुरंत हालात के हिसाब से ढलना होगा, ज़रूरी और गैर-ज़रूरी चीज़ों में फ़र्क करना होगा और पक्के इरादे के साथ कार्रवाई करनी होगी। याद रखें, जीत उसी योद्धा की होगी जो युद्धक्षेत्र में सबसे तेज़ी से हालात के अनुसार ढलेगा।"नौसेना प्रमुख ने कहा कि तीसरी बात है नतीजों की ज़िम्मेदारी। आज की आपस में गहराई से जुड़ी दुनिया में, छोटी-मोटी कार्रवाइयों के भी परिचालन , रणनीतिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय असर हो सकते हैं। इसके लिए संतुलन, परिपक्वता और संयम की ज़रूरत होगी, साथ ही अपनी कार्रवाइयों के नतीजों की साफ़ समझ भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "आपको अपनी योजनाओं, अभियानों और गतिविधियों के नतीजों के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार होना होगा।"उन्होंने कहा कि इन तीनों सच्चाइयों को स्वीकार करना और उनके हिसाब से काम करना ज़रूरी है। मौजूदा समय और आने वाले दिनों की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने वाले पाँच विचार साझा करते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, "- आपका दिमाग ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। तकनीक आपको जानकारी, रफ़्तार और सटीकता दे सकती है, लेकिन यह समझदारी की जगह नहीं ले सकती। अपनी सोच को किसी एल्गोरिदम के भरोसे न छोड़ें। समस्याओं को सुलझाएँ, अपनी मान्यताओं पर सवाल उठाएँ और हर दिन अपनी समझ को बेहतर बनाएँ। क्योंकि, आख़िरकार, निर्णायक फ़ायदा उसी को मिलेगा जो दुश्मन से बेहतर सोच पाएगा। इंसानी दिमाग की ताकत की कोई सीमा नहीं है।

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