कोलकाता , अप्रैल 12 -- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच, आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी ) ने रविवार को एक विवादित वीडियो पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की और पार्टी नेता हुमायूँ कबीर को बेदाग बताया।
इस वीडियो में कथित तौर पर पार्टी नेता हुमायूँ कबीर दिखाई दे रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि वीडियो से छेड़छाड़ की गयी है और इस क्लिप को उन्हें बदनाम करने के लिए "चुनिंदा तरीके से एडिट" किया गया है। पार्टी प्रवक्ता कमल हुसैन ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा वीडियो, बिना एडिट किया हुआ संस्करण जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा, "जिस वीडियो ने व्यापक विवाद खड़ा कर दिया है, उसके साथ छेड़छाड़ की गयी है। श्री कबीर को बदनाम करने के लिए इसे प्रसारित करने से पहले इसके कुछ हिस्सों को काटा और एडिट किया गया था।"उन्होंने बताया कि वीडियो को जांच के लिए पहले ही एक केंद्रीय फोरेंसिक एजेंसी के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि कि पार्टी ने इस मामले में कानूनी राहत पाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा, "हमने उच्च न्यायालय से संपर्क किया है और हमें विश्वास है कि उचित जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी।"उन्होंने वीडियो क्लिप के प्रसारित होने के समय पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह फुटेज 19 दिसंबर 2025 का है, लेकिन इसे इस साल आठ अप्रैल को सार्वजनिक किया गया। उन्होंने कहा, "इतने लंबे अंतराल के बाद वीडियो क्यों जारी किया गया? इसके समय के पीछे की मंशा संदिग्ध है।" इसके साथ ही उन्होंने एक संभावित राजनीतिक साजिश की ओर इशारा किया।
एजेयूपी के प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ने उस सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ चुनाव आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई है, जिससे यह वीडियो पोस्ट किया गया था। यह विवाद ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है, जब राज्य एक अहम चुनावी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। इस कथित स्टिंग ऑपरेशन ने श्री कबीर पर काफी दबाव डाल दिया है और विपक्षी दल इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता अभी तक सत्यापित नहीं हुई है, लेकिन इस क्लिप में कथित तौर पर श्री कबीर को बातचीत करते हुए दिखाया गया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के साथ उनके संबंधों का संकेत मिलता है। इसमें कथित तौर पर उन्हें वित्तीय लेन-देन के बारे में टिप्पणी करते हुए और दिल्ली जाने के एक प्रस्ताव का ज़िक्र करते हुए भी सुना जा सकता है। हालांकि श्री कबीर ने वीडियो की प्रामाणिकता से साफ इनकार किया है, और इसे मनगढ़ंत तथा राजनीति से प्रेरित बताया है।
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