श्रीनगर , अक्टूबर 24 -- पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी तथा हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (एचआईएएल) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीतांजलि आंगमो ने लद्दाख प्रशासन के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए प्रशासन पर ही देरी और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।

यह आरोप उच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे के बाद सामने आया है, जिसमें लेह में संस्थान की जमीन पर उसके दावे पर सवाल उठाये गये हैं। यह हलफनामा बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया। यह एचआईएएल द्वारा दायर एक रिट याचिका के जवाब में था, जिसमें 21 अगस्त, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत संस्थान को आवंटित भूमि का पट्टा रद्द कर दिया गया था। प्रशासन ने न्यायालय को बताया कि एचआईएएल लेह में बिना बकाया चुकाए सरकारी जमीन पर कब्जा किये हुए है। प्रशासन का तर्क है कि यह आवंटन 2019 में ही अपने आप खत्म हो गया था और श्री वांगचुक की 'प्रतिष्ठा और सम्मान' संस्थान को उस जमीन पर कोई कानूनी अधिकार नहीं दिला सकते।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित