लखनऊ , अक्टूबर 22 -- नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 7वें एग्रीवोल्टिक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 के 'स्टेट मिनिस्ट्रियल पिच' सत्र में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा दृष्टि और एग्रीवोल्टिक्स रणनीति प्रस्तुत की।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का अन्न भंडार होने के साथ-साथ कृषि भूमि को प्रभावित किए बिना स्वच्छ ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनाना भी है।

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सौर ऊर्जा क्रांति का विस्तार हो रहा है। घरों की छतों से लेकर कृषि क्षेत्रों तक जनभागीदारी के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाएं देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रहा है। राज्य सौर ऊर्जा उत्पादन, किसान सशक्तीकरण और निवेश के नए अवसरों के सृजन के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब तीन करोड़ किसान कृषि पर निर्भर हैं। राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक कृषि जोतें एक हेक्टेयर से छोटी हैं। ऐसे में एग्रीवोल्टिक्स किसानों के लिए महत्वपूर्ण समाधान साबित हो सकता है।

एग्रीवोल्टिक्स प्रणाली में ऊंचाई पर सौर पैनल लगाए जाते हैं और उनके नीचे फसलों की खेती की जाती है। इससे एक ही खेत से अनाज और बिजली दोनों का उत्पादन संभव होता है। इस मॉडल के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के तीनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है।

ए.के. शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश एग्रीवोल्टिक्स के लिए एशियाई विकास बैंक से तकनीकी सहायता प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके तहत वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में 100 किलोवाट क्षमता का एग्रीवोल्टिक संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022, जैव ऊर्जा नीति 2022 और ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2024 के तहत निजी निवेशकों को कई महत्वपूर्ण प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

ए.के. शर्मा ने कहा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश @2047' की परिकल्पना के तहत राज्य ने 2030 तक 32 गीगावाट और 2047 तक 150 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम 2.0 योजना में 10 गीगावाट का एग्रीवोल्टिक्स घटक शामिल है। उत्तर प्रदेश इस पहल में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

ऊर्जा मंत्री ने वैश्विक निवेशकों, परियोजना डेवलपर्स और विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करने, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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