बड़वानी , जुलाई 21 -- मध्यप्रदेश में बड़वानी जिले के राजपुर में एक ही गोत्र में विवाह करने वाले दंपती और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार तथा आर्थिक दंड के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ताओं को किसी प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़े और वे पुलिस सुरक्षा की मांग करें, तो संबंधित पुलिस उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए।
राजपुर निवासी महेंद्र लोनारे ने बताया कि उनके पुत्र हर्ष लोनारे और निकिता ने कई वर्षों के प्रेम संबंध के बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह किया। उनका कहना है कि दोनों का गोत्र एक होने के बावजूद पिछले दस पीढ़ियों से दोनों परिवारों के बीच कोई वैवाहिक संबंध नहीं रहा और विवाह कानून के अनुरूप संपन्न हुआ।
महेंद्र लोनारे के अनुसार विवाह से पहले कुशवाहा समाज के कुछ पदाधिकारियों ने बैठक कर निर्णय लिया था कि विवाह होने पर दोनों परिवारों को 11 वर्ष के लिए समाज से निष्कासित किया जाएगा तथा दोनों पक्षों पर 51-51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही विवाह में शामिल होने वाले लोगों से 2,100 रुपये का दंड वसूलने का भी निर्णय लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह के बाद हुई दूसरी बैठक में दोनों परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की अवधि बढ़ाकर आजीवन कर दी गई तथा विवाह में शामिल लोगों पर लगाया गया जुर्माना बढ़ाकर 5,100 रुपये कर दिया गया।
हर्ष लोनारे ने आरोप लगाया कि समाज के कुछ पदाधिकारियों ने परंपरा का हवाला देकर उनके परिवारों का बहिष्कार किया और आर्थिक दंड लगाया। उनकी पत्नी निकिता ने कहा कि विवाह कानूनन वैध होने के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
कुशवाहा समाज के पूर्व जिला महामंत्री नंदराम कुशवाहा ने समाज के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि हर्ष और निकिता ने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने बताया कि निर्णय का विरोध करने पर उन्हें छह वर्ष के लिए पद से हटा दिया गया।
महेंद्र लोनारे ने बताया कि पुलिस और प्रशासन से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इंदौर खंडपीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर राज्य शासन से जवाब मांगा है तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई फिलहाल न्यायालय में लंबित है।
उधर, कुशवाहा समाज की बड़वानी, खरगोन और धार इकाई के अध्यक्ष रमेशचंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन्हें अभी तक हाईकोर्ट का कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। नोटिस मिलने पर वे न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
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