चेन्नई , जनवरी 22 -- एशियाई गुर्दा एवं मूत्रविज्ञान संस्थान (एआईएनयू) के चिकित्सकों ने एक 70 वर्षीय पिता की किडनी उनकी 31 वर्षीय बेटी को प्रत्यारोपित किया, जो एंड-स्टेज रीनल रोग (ईएसआरडी) से जूझ रही थी।

उल्लेखनीय है कि मरीज की यह यात्रा तीन साल पहले शुरू हुई थी जब वह अपनी पहली गर्भावस्था से पहले मलेशिया में थीं, उसके पैरों, टखनों और पंजों में सूजन के निशान थे और वह उच्च रक्तचाप से पीड़ित थी, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया।

अस्पताल से जारी एक बयान में कहा गया, ''वह जब दिसंबर 2024 में एआईएनयू पहुंचीं, तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी और मेडिकल टीम को एक जटिल चिकित्सीय स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसमें मरीज सीकेडी चरण 5, गंभीर फ्लूइड ओवरलोड और जानलेवा एनीमिया से पीड़ित थी, जिसमें हीमोग्लोबिन का स्तर सिर्फ 4जी/डीएल था।''उन्हें भर्ती किया गया, स्थिति स्थिर की गई और उसके बाद नियमित डायलिसिस पर रखा गया। इसके अलावा प्रत्यारोपण की तैयारी के दौरान चिकित्सकीय टीम ने एक बढ़े हुए सर्वाइकल लिम्फ नोड की पहचान की।

उन्हें भर्ती किया गया, स्थिति स्थिर की गई और उसके बाद नियमित डायलिसिस पर रखा गया। इसके अलावा प्रत्यारोपण की तैयारी के दौरान चिकित्सकीय टीम ने बढ़ी हुई गर्दन की ग्रंथियों की पहचान की।

बायोप्सी के नतीजों से टीबी की पुष्टि हुई, जिसके लिए छह महीने के एंटी-ट्यूबरकुलर इलाज की आवश्यकता पड़ी और संक्रमण से पूरी तरह ठीक होने के बाद ही उन्हें प्रत्यारोपण की मंजूरी मिली।

मरीज ने कहा, "अपने पिता को इस उम्र में भी बिना सोचे-समझे आगे बढ़ते देखकर मुझे उम्मीद की एक नई किरण मिली। मुझे लगता है कि मैं बदल गई हूं। मुझे दूसरी जिंदगी मिली है।"पूरी प्रक्रिया छह घंटे में बिना किसी जटिलता के पूरी की गई। एआईएनयू चेन्नई के डॉ. नविनाथ ने कहा, "मुख्य चुनौती डोनर की उम्र के साथ-साथ मरीज की जटिल चिकित्सकीय इतिहास और टीबी इन्फेक्शन थी। डोनर की 70 साल की उम्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके रीनल रिजर्व का बहुत सावधानी से मूल्यांकन करना जरूरी था।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित