, March 5 -- पटना, 05 मार्च (वार्ता बिहार के सभी जिलों में एक अप्रैल से सरकारी और निजी बसों/वाहनों के चालकों को अनिवार्य सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राज्य सरकार सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर ड्राइवर ट्रेनिंग अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय योजना-3 के तहत "सबका सम्मान" और "जीवन आसान" में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को भी रखा गया है। इसके लिए पहले चरण में पटना और औरंगाबाद में चालकों को सड़क सुरक्षा पर ट्रेनिंग दी जा रही है। दूसरे चरण में एक अप्रैल से सभी जिलों में सरकारी और निजी बसों/वाहनों के चालकों को अनिवार्य सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग प्रति शनिवार को आयोजित की जाएगी, जिससे चालक अपनी ड्यूटी के साथ इसमें आसानी से शामिल हो सकें।

प्रशिक्षण में मुख्य रूप से ज़ेब्रा क्रॉसिंग पर रुकना, हॉर्न का कम इस्तेमाल, सीट बेल्ट लगाना, ओवरटेकिंग के नियम, स्पीड लिमिट का पालन, ट्रैफिक सिग्नल पर रूकना और अन्य महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर फोकस रहेगा। परिवहन विभाग इस कार्यक्रम के लिए एक विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार कर रहा है, जिसमें ट्रेनिंग की अवधि, मॉड्यूल, प्रमाण-पत्र और निगरानी की व्यवस्था शामिल होगी।

परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने इस पहल पर कहा कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण अक्सर चालकों की लापरवाही और नियमों की अनदेखी होती है। विभाग का लक्ष्य है कि इसमें सरकारी एवं निजी बस चालक, टैक्सी ऑपरेटर, ट्रक ड्राइवर और अन्य कमर्शियल वाहन चालक शामिल हों। इन्हें नियमित रूप से जागरूक बनाया जाए। पटना और औरंगाबाद में पहले चरण की ट्रेनिंग से सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जहां चालकों की जागरूकता में सुधार देखा गया। अब पूरे राज्य में इसे लागू कर बिहार की सड़कों को और सुरक्षित बनाया जायेगा। यह ट्रेनिंग न केवल चालकों के लिए बल्कि यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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