बेंगलुरु , जुलाई 24 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उच्च न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक अगस्त के लिए अपनी धारवाड़ पीठ में केवल महिला न्यायाधीशों की विशेष पीठ गठित की है। इस दिन धारवाड़ पीठ की सभी न्यायालयों का संचालन पूरी तरह से महिला न्यायाधीश ही करेंगी।
मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू के आदेश पर जारी इस विशेष व्यवस्था के तहत धारवाड़ पीठ की सभी सात न्यायालयों का नेतृत्व महिला न्यायाधीश करेंगी। इसमें तीन खंडपीठ और चार एकल पीठ शामिल हैं। कर्नाटक उच्च न्यायालय के इतिहास में इस तरह की पहल पहली बार की जा रही है।
तीन खंडपीठों में कुल छह महिला न्यायाधीश होंगी, जो विभिन्न अपीलों और रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेंगी। वहीं चार एकल पीठ सिविल, आपराधिक, नौकरी, श्रम, शिक्षा, मध्यस्थता, व्यापार और पारिवारिक मामलों का निपटारा करेंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उस पूरे दिन न्यायालय का सारा कामकाज केवल महिला न्यायाधीशों द्वारा ही संभाला जाएगा।
न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति के.जी. शांति की पहली खंडपीठ रिट और सिविल मामलों की सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति ज्योति एम. और न्यायमूर्ति पी. श्री सुधा की दूसरी खंडपीठ मोटर दुर्घटना, कर्मचारी मुआवजा, ईएसआई, श्रम, सेवा और कर से जुड़ी अपीलों को देखेंगी।
न्यायमूर्ति ललिता कन्नेगंती और न्यायमूर्ति के.एस. हेमालेखा की तीसरी खंडपीठ पारिवारिक मामलों, मोटर वाहन, केईबी, आबकारी और कर्नाटक राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के मामलों पर सुनवाई करेगी।
एकल पीठों में, न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमालता सेवा, श्रम और पारिवारिक अदालत से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू शिक्षा और सिविल प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं को देखेंगी। न्यायमूर्ति गीता के.बी. मध्यस्थता और व्यापारिक मामलों की सुनवाई करेंगी, जबकि न्यायमूर्ति राजेश्वरी एन. हेगड़े सभी तरह के आपराधिक मामलों और अन्य सिविल मामलों की अध्यक्षता करेंगी।
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