राजनांदगांव , सितंबर 16 -- छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जिले के सहदेव नगर और मोहारा रोड स्थित प्रीमियम विदेशी मदिरा दुकानों में एक अक्टूबर 2026 से शत-प्रतिशत कैशलेस भुगतान व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत इन दुकानों के काउंटर पर नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा और बिक्री पीओएस अथवा ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से होगी।

इस निर्णय के बाद नकद भुगतान स्वीकार नहीं किए जाने की वैधानिकता और उपभोक्ताओं को होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विधि और उपभोक्ता मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना नीतिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन नकद भुगतान पूरी तरह बंद करने की कानूनी स्थिति अलग विषय है।

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 26 में बैंक नोटों को वैध मुद्रा से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। वहीं शराब के व्यापार और बिक्री को विनियमित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है तथा राज्य बिक्री की प्रक्रिया और शर्तें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि शराब बिक्री की शर्तों के तहत केवल डिजिटल भुगतान अनिवार्य करने की सीमा क्या है।

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल डिजिटल भुगतान की व्यवस्था से ऐसे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है, जिनके पास स्मार्टफोन, डिजिटल बैंकिंग अथवा कार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा पीओएस मशीन, यूपीआई नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी में तकनीकी खराबी आने की स्थिति में बिक्री प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

कैशलेस व्यवस्था को ओवररेटिंग और नकद लेनदेन से जुड़ी अनियमितताओं पर नियंत्रण की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। हालांकि इस व्यवस्था में असफल डिजिटल लेनदेन, राशि फंसने और तकनीकी बाधा की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता की आवश्यकता बताई जा रही है।

जानकारों का कहना है कि शराब कारोबार पर राज्य का व्यापक नियामकीय नियंत्रण होने के कारण कैशलेस व्यवस्था की वैधानिक स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित आबकारी नियमों, निगम के आदेश और लागू केंद्रीय कानूनों के समग्र परीक्षण पर निर्भर करेगा।

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