इंफाल , मार्च 14 -- मणिपुर में ऑल कोंगबा रोड यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइज़ेशन (एकेआरयूसीओ) ने जनगणना के काम में आ रही समस्याओं पर गहरी चिंता जताई है।
संस्था के संयोजक लेनिन हिरोम ने आज अधिकारियों से आग्रह किया कि वे जनगणना का काम शुरू करने से पहले अवैध प्रवासियों की पहचान करें।
श्री लेनिन हिरोम ने सरकार से अपील की कि जनगणना कराने से पहले अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसे तंत्र लागू किए जाएं।
संगठन ने तर्क दिया कि इस मुद्दे को हल किए बिना जनगणना करने से जनसंख्या के आंकड़ों में गलतियां हो सकती हैं।
संस्था ने राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति का भी ज़िक्र किया, जिसमें सांप्रदायिक तनाव हावी है। इसे एक निष्पक्ष और सटीक जनगणना कराने में एक बड़ी चुनौती बताया गया। संस्था ने बताया कि स्थिति की गंभीरता मौजूदा विधानसभा सत्र में भी झलक रही है, जहाँ सुरक्षा चिंताओं के कारण उपमुख्यमंत्री सहित कई विधायक कथित तौर पर ऑनलाइन ही कार्यवाही में हिस्सा ले रहे हैं।
संस्था ने आगे कहा कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में जनगणना की जाती है, तो सरकार आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए आवास के सटीक आंकड़े कैसे सुनिश्चित करेगी। संस्था ने आगाह किया कि अवैध प्रवासियों की पहचान किए बिना यह काम करने से राज्य के मूल निवासियों के जनसंख्या के आंकड़े बिगड़ सकते हैं।
संस्था के अनुसार गलत जनगणना से संसाधनों के बंटवारे पर भी असर पड़ सकता है, राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं और सामाजिक तनाव और गहरा सकता है। संस्था ने कहा कि जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए अवैध प्रवासन के मुद्दे को पहले ही हल करना ज़रूरी है।
संस्था ने 2011 की जनगणना का भी ज़िक्र किया, जिसके बारे में उसने दावा किया कि उसमें मणिपुर में जनसंख्या में असामान्य वृद्धि दिखाई गई थी। पड़ोसी देश म्यांमार में जारी अस्थिरता को देखते हुए कहा कि राज्य में बिना रोक-टोक और अधिक प्रवासन की संभावना को लेकर चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों जिसमें ''विस्थापित लोगों का पुनर्वास अभी बाकी है, कई इलाकों में आवाजाही पर पाबंदी है और राज्य के कुछ हिस्सों में ज़िला प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है'' को देखते हुए संस्था ने सरकार से जनगणना का काम टालने का आग्रह किया।
संस्था ने पिछले उदाहरणों का हवाला दिया, जहाँ असाधारण परिस्थितियों का सामना कर रहे क्षेत्रों में जनगणना का काम टाल दिया गया था; इनमें 1951 में जम्मू-कश्मीर, 1961 में अरुणाचल प्रदेश और 1981 में असम शामिल हैं।
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