पटना , मई 28 -- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने गुरूवार को कहा कि राज्य सरकार बिहार में मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों विशेषकर एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस/चमकी बुखार) की रोकथाम एवं उपचार को लेकर पूरी गंभीरता एवं सतर्कता के साथ काम कर रही है।
श्री कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं तथा मरीजों को त्वरित एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए व्यापक एवं विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि एईएस से अत्याधिक प्रभावित 15 जिलों में 10 बेड वाले पीआईसीयू वार्ड स्थापित किए गए हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच में 100 बेड वाले अत्याधुनिक पीआईसीयू वार्ड की व्यवस्था की गई है, जिससे गंभीर मरीजों को त्वरित एवं बेहतर उपचार उपलब्ध करायी जा सके। इसके अतिरिक्त अत्यधिक प्रभावित 15 जिलों को छोड़कर अन्य जिलों के सभी जिला अस्पतालों में पांच तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में दो डेडिकेटेड बेड आरक्षित रखे गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गर्मी एवं उमस के मौसम को देखते हुए पूरे राज्य विशेषकर पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी एवं शिवहर जिलों में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि एईएस/चमकी बुखार की रोकथाम, समय पर पहचान एवं त्वरित उपचार के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है। मुजफ्फरपुर सहित प्रभावित जिलों में चिकित्सा महाविद्यालयों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्लूसी) स्तर तक एईएस/जेई के नोडल पदाधिकारियों को चिन्हित किया गया है तथा विशेष वार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
श्री कुमार ने बताया कि सुविधाओं एवं चिकित्सकीय उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि सभी मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पतालों को आवश्यक दवाओं एवं उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। साथ ही डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को बेहतर एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
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