तिरुवनंतपुरम , जून 05 -- साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन विशेषज्ञ के. एस. मनोज ने एअर इंडिया विमान एआई171 हादसे की विस्तृत, पारदर्शी और सबूतों पर आधारित जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी संभावित पहलू को समय से पहले खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

एअर इंडिया विमान एआई171 में पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए हादसे में 260 लोगों की मौत हो गयी थी।

एक बयान में श्री मनोज ने कहा कि हालांकि जांचकर्ताओं का ध्यान स्वाभाविक रूप से विमान की प्रणालियों, रखरखाव के रिकॉर्ड, मौसम की स्थिति और परिचालन से जुड़े कारणों पर होगा, लेकिन आधुनिक विमानन क्षेत्र के लगातार डिजिटल होते स्वरूप को देखते हुए सॉफ्टवेयर और साइबर से जुड़े पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के समय के कमर्शियल विमान जटिल 'साइबर-फिजिकल सिस्टम' हैं जो पूरी तरह से सॉफ्टवेयर, फर्मवेयर, विमानन इलेक्ट्रॉनिक्स (एवियोनिक्स), डिजिटल सेंसर, संचार नेटवर्क और कम्प्यूटरीकृत रखरखाव प्लेटफॉर्म पर निर्भर करते हैं। इसलिए, जांचकर्ताओं को इस बात की बारीकी से जांच करनी चाहिए कि क्या किसी सॉफ्टवेयर की खराबी, फर्मवेयर की गड़बड़ी, कॉन्फ़िगरेशन की त्रुटि, या रखरखाव से जुड़ी किसी डिजिटल समस्या के कारण तो यह दुर्घटना नहीं हुई।

श्री मनोज के अनुसार, विमान की प्रणालियों की शुद्धता की पुष्टि करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट, फर्मवेयर में किए गए बदलावों, रखरखाव के दौरान अपलोड किए गए डेटा, प्रणालियों में किए गए बदलावों और 'सिस्टम लॉग्स' की विशेष रूप से गहन जांच की जानी चाहिए।

विशेषज्ञ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि कमियां न केवल यांत्रिक (मैकेनिकल) विफलताओं से आ सकती हैं, बल्कि सॉफ्टवेयर प्रबंधन, अपडेट करने के तरीकों, नियंत्रण प्रणालियों और आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन की कमजोरियों से भी पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा के पारंपरिक पैमानों के साथ-साथ सॉफ्टवेयर की शुद्धता, फर्मवेयर के इतिहास, रखरखाव श्रृंखला की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती की भी जांच की जानी चाहिए।

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