वाराणसी , अगस्त 22 -- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को रिप्लेसमेंट के रूप में नहीं, बल्कि एक सहायक के तौर पर देखा जाना चाहिए। एआई शिक्षण, अधिगम और अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रो. चतुर्वेदी शनिवार को यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, बीएचयू द्वारा उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग पर आयोजित छह दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। 22 से 27 अगस्त तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को एआई के व्यावहारिक उपयोग और आवश्यक कौशल से सशक्त बनाना है।
कुलपति ने कहा कि एआई केवल सूचना खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि दस्तावेजों और उपलब्ध सामग्री को समझने तथा उनका विश्लेषण कर सार्थक निष्कर्ष निकालने में भी सहायता कर सकती है। उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि चैटजीपीटी का उपयोग करने पर उन्हें महसूस हुआ कि यह सामान्य सर्च इंजन से आगे बढ़कर सूचना के अर्थ और संदर्भ को समझने में सक्षम है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. अखिलेश सिंह रघुवंशी ने एआई को परिवर्तनकारी तकनीक बताते हुए कहा कि इससे भयभीत होने के बजाय इसे समझने और अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने ड्राफ्टिंग, अनुसंधान और विश्लेषण में एआई को उपयोगी असिस्टेंट के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के प्रो. के. श्रीनिवास ने उच्च शिक्षा में एआई के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप एआई शिक्षण और अधिगम को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण, लचीला और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायक हो सकती है।
मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने बताया कि केंद्र की 12 कार्यक्रमों की श्रृंखला में नौ कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं और 1,248 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में पाठ योजना, शिक्षण संसाधन, मूल्यांकन, अनुसंधान, पाठ्यक्रम निर्माण और शैक्षणिक प्रशासन में एआई के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, झारखंड और केरल समेत विभिन्न राज्यों के 50 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
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