नयी दिल्ली , फरवरी 17 -- राजधानी में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्रांतिकारी प्रसार के युग में रोजगार की स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई जिसमें परिस्थिति अनुसार बदलती श्रम नीति , सामाजिक सुरक्षा और री-स्किलिंग (पुनर्कौशल प्रशिक्षण) पर बल दिया गया है।

यहां भारत मंडपम में चल रहे भारत के वैश्विक एआई सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित एक सत्र "एआई के इस्तेमाल पर वैश्विक विमर्श - ठोस श्रम बाजार के लिए डेटा" शीर्षक सेशन में एआई को तेज़ी से अपनाने के संदर्भ में काम और नौकरी के बदलते हालात और इस बदलाव का सामना करने के लिये ज़रूरी नीतिगत सुधारों पर बल दिया गया।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य शमिका रवि ने कहा, " भारत इकाइयों के स्तर पर एआई अपनाने के मामले में सबसे ऊंचे स्तर पर दिखता है, जो खुलेपन और सकारात्मक सोच- दोनों की पहचान है।" उन्होंने कहा कि उत्पादकता पर एआई केअसर को अभी भी मापा जा रहा है। भारत में खासकर स्वास्थ्य , शिक्षा और सेवा क्षेत्र की -पुरानी चुनौतियों के समाधान में एआई को अच्छे खासे पैमाने पर लागू किए जाने की संभावना है, जहां आखिरी कड़ी की दिक्कतों के चलते पारंपरिक रूप से परिणाम अभी सीमित बने हुए हैं।"उभरते हुए विश्व के आधार पर चर्चा में कहा गया कि आईटी के प्रसार का अलग-अलग आयुवर्ग , क्षेत्र और जगह के श्रमिकों पर अलग-अलग असर देखा गया है। शुरुआती रुझानों से पता चला कि ज़्यादा एआई से प्रभावित भूमिकाओं में युवा कर्मचारियों पर नौकरी का दबाव बढ़ा है।

प्रतिभागी विशेषज्ञों ने कहा कि डेटा की कमी से सरकारें लक्षित समाधान समय पर नहीं कर पातीं। इस चर्चा में श्रम बाजार की चुनौतियों से निपटने के लिए सही सूचनाओं के अभाव में भी अडैप्टिव (परिस्थिति के अनुसार ढलने) की नीति के साथ आगे बढ़ने, सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने और री-स्किलिंग (पुनर्कोशल) के तरीकों को बढ़ाने के महत्व पर ज़ोर दिया गया है।

चर्चाओं में कहा गया है कि सेवा , कृषि और सेवाओं के वितरण जैसे क्षेत्रों में संदर्भ-केंद्रित रणनीति की ज़रूरत होगी। इसमें अंतराष्ट्रीय सहयोग और अनुभवों का आदान प्रदान होना चाहिए ताकि एआई के बीच वृद्धि समावेशी हो सके।

चर्चा में केन्या के विशेष प्रौद्योगिकी दूतफिलिप थिगो ने कहा कि एआई के प्रभावों से निपटने के लिए कौशल बढ़ाने , पुनर्कौशल से कहीं ज्यादा जरूरत मज़बूत सामाजिक सुरक्षा भी है।

माइक्रोसॉफ्ट के दायित्वपूर्ण एआई विषय पर सार्वजनिक नीति के निदेशक हेक्टर डी रेवोइरे ने कहा कि एआई के असर के बारे में हमारे पास अभी जो ज़्यादातर सबूत हैं, वे कुछ देशों, खासकर अमेरिका से मिल रहे हैं।

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