नयी दिल्ली , फरवरी 19 -- राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में जारी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर महिलाओं को मज़बूत बनाने पर खास ध्यान दिया गया है।
इस समिट में दिखाया गया कि कैसे एआई के माध्यम से विभिन्न प्रकार की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिये उद्यमिता की नयी परिभाषा दे रही हैं, जिससे उन्हें भाषा, बाजार पहुंच और सीमित संसाधनों जैसी रुकावटों को दूर करने में मदद मिल रही है। इस संदर्भ में, "शी लीड्स भारत" संगठन उन ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए काम कर रहा है जो छोटे कारोबार चलाती हैं, इसके लिए वह उन्हें ढांचागत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सहायता दे रहा है। यह संगठन महिला उद्यमियों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ''मेरी सहेली ऐप'' पर ऑनबोर्ड कर सहायता प्रदान करता है, जहाँ उन्हें बेहतर कीमत, बेहतर मार्जिन और ऐसी सेवाओं तक पहुंच मिलती है जो गांव के स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान पेश करती हैं।
"शी लीड्स भारत" अभी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात समेत पांच राज्यों में सक्रिय है और इसके पास 40,000 महिला उद्यमियों का नेटवर्क है, जिन्हें "सहेली" के नाम से जाना जाता है। इस पहल से महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण एंटरप्राइजेज को मजबूत करने और एआई के जिम्मेदार और प्रयोगात्मक इस्तेमाल से समावेशी प्रगति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यूनीवार्ता ने शी लीड्स भारत'' पहल से जुड़ी रुचि सिंह से बात की है जो वाराणसी जिले के सेवापुरी ब्लॉक के नवाहनीपुर गांव के अग्रणी बाजार की "सहेली" भी हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। रुचि एक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सक्रिय सदस्य भी हैं जो समुदाय उन्मुख उद्यमिता में उनके गहरे जुड़ाव को दिखाता है। अपने इस सफर में, रुचि डिजिटल उपकरण के कम इस्तेमाल से आगे बढ़कर अपने काम में स्मार्टफोन और एआई सक्षम प्लेटफॉर्म का आत्मविश्वास से इस्तेमाल करने लगी हैं। वह अपने गांव की दूसरी महिलाओं के लिये एक रोल मॉडल बन गई हैं, जो अब सलाह और प्रेरणा के लिए उनसे उम्मीद करती हैं। अपनी कोशिशों को बढ़ाने के लिए, शी लीड्स भारत ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ सहभागिता की है।
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