नयी दिल्ली,20 मार्च, 2026 (वार्ता) येल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चैटबॉट डिजिटल सहायक उपकरण न केवल हमें जानकारी देते हैं, बल्कि बेहद चतुराई से हमारी सामाजिक और राजनीतिक सोच को भी बदल सकते हैं।
आज के दौर में जब हम सामान्य जानकारी के लिए भी निर्भर होते जा रहे हैं, तब यह चौंकाने वाला शोध सामने आया है।
अब तक माना जाता था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तभी किसी को प्रभावित करती है, जब उसे जानबूझकर ऐसा करने का निर्देश दिया जाए। लेकिन इस नये अध्ययन ने साबित कर दिया है कि सामान्य ऐतिहासिक तथ्यों के सारांश भी पाठकों की सोच को मोड़ सकते हैं। यह सब उन अंतर्निहित कारणों की वजह से होता है, जो इन मॉडलों को प्रशिक्षित करने वाले डाटा से अनजाने में इनमें समा जाते हैं।
येल विध्वविद्यालय में समाजशास्त्र के सहायक प्रोफेसर डैनियल करेल के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने 1919 की सिएटल हड़ताल और 1968 के छात्र आंदोलनों जैसे विषयों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से तैयार विवरणों का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि विकिपीडिया जैसे पारदर्शी मंचों की तुलना में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जवाबों ने पाठकों के दृष्टिकोण को एक विशेष वैचारिक दिशा की ओर झुका दिया।
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