नयी दिल्ली , फरवरी 17 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब कोई विकल्प नहीं है बल्कि ज़िंदगी के हर हिस्से में काम करने का एक ज़रूरी उपकरण बन गया है।
डॉ सिंह यहां भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट -2026 में "भारतजेन मॉडल्स: विज़न एंड टेक्निकल एग्ज़िक्यूशन 2026" विषय पर एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सत्र भारतजेन ने इंडिया एआई मिशन, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) , और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर आयोजित किया था।
उनकी मौजूदगी में भारतजेन और आईआईटी बॉम्बे हेरिटेज फाउंडेशन के बीच एक करार के दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी हुआ।
डॉ सिंह ने भारतजेन टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारत की टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि भारतजेन एक सरकारी मालिकाना हक वाली स्वतंत्र मल्टीलिंगुअल (बहु भाषी) और मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) पहल के तौर पर सबसे अलग है, जिसे भारत के सामाजिक- सांस्कृतिक संदर्भ और भाषाई विविधता के हिसाब से बनाया गया है। भारतजेन एक "संपूर्ण विज्ञान, संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र" के मॉडल का उदाहरण है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की भाषाई विविधता 22 अनुसूचित भाषाओं से आगे तक फैली हुई है और व्यापक रूप से बोली जाने वाली क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को शामिल करने के लिए डेटासेट का लगातार विस्तार करने की आवश्यकता है।
भारतजेन पहल आईआईटी बॉम्बे में आईओटी और आईओई के लिए टीआईएच फाउंडेशन के नेतृत्व में एक संघ के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है, जिसमें आईआईआईटी हैदराबाद, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मंडी, आईआईटी कानपुर, आईआईएम इंदौर और आईआईटी मद्रास जैसे साझेदार संस्थान शामिल हैं।
इसके लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (एनएम-आईसीपीएस) के माध्यम से 235 करोड़ रुपये की वित्त सहायता दे रहा है। इसे मेइटी के अंतर्गत 10,585 करोड़ रुपये के बजट वाले भारत एआई मिशन के माध्यम से मजबूत किया गया है।
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