चंडीगढ़ , जून 20 -- हरियाणा में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी ) से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड के आवेदन को खारिज करने की मांग की है।
एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने शनिवार को आयोग को भेजे पत्र में कहा कि राजस्व-संपन्न क्षेत्रों में समानांतर वितरण लाइसेंस देना जनहित के विपरीत है और इससे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएनएल ) की वित्तीय स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
फेडरेशन के मीडिया सलाहकार वी.के. गुप्ता ने कहा कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड के पास बिजली वितरण क्षेत्र का कोई सिद्ध अनुभव या परिचालन क्षमता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने वितरण नेटवर्क की तैयारी, उपभोक्ता सेवा ढांचा, स्काडा प्रणाली, सब-स्टेशन विकास योजना, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था संबंधी कोई विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है।
एआईपीईएफ ने कहा कि समानांतर लाइसेंस व्यवस्था से बुनियादी ढांचे की दोहरावपूर्ण स्थापना, मीटरिंग व्यवस्था में जटिलता, प्रशासनिक खर्च में वृद्धि, राइट-ऑफ-वे विवाद और परिचालन संबंधी समस्याएं पैदा होंगी। संगठन के अनुसार प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद उच्च भुगतान क्षमता वाले औद्योगिक, व्यावसायिक और प्रीमियम उपभोक्ताओं को आकर्षित करना है। फेडरेशन का दावा है कि प्रस्तावित क्षेत्र डीएचबीवीएनएल के कुल राजस्व में लगभग 27.54 प्रतिशत योगदान देता है। अकेले गुरुग्राम में 7,79.4 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति से लगभग 6,386 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
एआईपीईएफ ने चेतावनी दी कि यदि उच्च राजस्व देने वाले उपभोक्ता निजी लाइसेंसधारी की ओर चले गए तो डीएचबीवीएनएल की आय पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही लंबे समय के बिजली खरीद समझौतों के तहत निगम को क्षमता शुल्क और अन्य वित्तीय दायित्वों का बोझ उठाना पड़ेगा, जिसका असर अंततः शेष उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
फेडरेशन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद पर अत्यधिक निर्भर रहने की योजना बना रही है, जबकि ट्रांसमिशन एक्सेस, ग्रिड सुरक्षा, लोड फ्लो और सिस्टम स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई है। उन्होंने सुरक्षा जमा, बकाया राशि, उपभोक्ता शिकायत निवारण, नेटवर्क एक्सेस और निजी लाइसेंसधारी के दिवालिया होने या कारोबार छोड़ने की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई है।
फेडरेशन ने आयोग से मांग की है कि जब तक उपभोक्ता स्थानांतरण और बहु-लाइसेंसधारी नियामक ढांचे पर स्पष्ट नीति नहीं बन जाती, तब तक किसी भी समानांतर लाइसेंस आवेदन पर विचार न किया जाए। साथ ही ग्रिड सुरक्षा, बिजली खरीद दायित्वों, ट्रांसमिशन प्रतिबद्धताओं, टैरिफ प्रभाव और कर्मचारियों के हितों पर स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय अध्ययन कराने की भी मांग की गई है।
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