धार , अगस्त 13 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और गंभीर मामला सामने आया है। समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने के चलते एक गर्भवती महिला को अस्पताल से महज 200 मीटर की दूरी पर सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा। स्थानीय महिलाओं और एक पूर्व स्वास्थ्यकर्मी की मदद से जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार धरमपुरी तहसील के ग्राम भारुडपुरा उतावली निवासी संगीताबाई को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि एंबुलेंस नालछा गई है और लौटने में कम से कम तीन घंटे लगेंगे। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने किसी तरह निजी वाहन की व्यवस्था की और उसे गुजरी के शासकीय अस्पताल के लिए रवाना हुए।

वाहन अस्पताल से करीब 200 मीटर पहले पहुंचा था, तभी संगीताबाई की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। स्थिति को देखते हुए परिजनों को बीच रास्ते में ही वाहन रोकना पड़ा। सड़क पर महिला की हालत देखकर पूर्व स्वास्थ्यकर्मी निर्मला बाई और अन्य ग्रामीण महिलाएं मदद के लिए आगे आईं। महिलाओं ने साड़ियों और कंबलों से आड़ बनाकर सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराया। महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को गुजरी अस्पताल पहुंचाया गया। गुजरी अस्पताल की डॉक्टर ज्योति चौहान ने बताया कि अस्पताल परिसर में स्टाफ पूरी तरह उपलब्ध था, लेकिन महिला को समय पर एंबुलेंस या उचित परिवहन नहीं मिलने के कारण वह अस्पताल तक नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने इस स्थिति के लिए एंबुलेंस प्रबंधन व्यवस्था को जिम्मेदार बताया।

घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आपातकालीन परिवहन सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने जिला प्रशासन से व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े।

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