शिलांग , जून 23 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने मंगलवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए कई कड़े निर्देश दिये। उन्होंने जहां 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' की प्रगति की समीक्षा की, वहीं अल-नीनो के संभावित खतरों से निपटने के लिए मेघालय जलवायु परिषद के साथ राज्य की तैयारियों का जायजा भी लिया।

बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने मेघालय की स्थिति को देखते हुए बायोमास, बायोगैस, लघु पनबिजली प्रणालियों और सौर ऊर्जा जैसे नये विकल्प तलाशने पर जोर दिया ताकि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक बिजली पहुंचायी जा सके।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पहाड़ी इलाका होने और परिवहन की दिक्कतों के कारण केंद्र की भारी सब्सिडी के बावजूद स्थानीय लोगों को वैकल्पिक उर्जा के संसाधनों को स्थापित करने में शुरुआती खर्च काफी ज्यादा पड़ता है। इसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने लागत को कम करने और घरों के लिए सौर ऊर्जा को अधिक किफायती बनाने के उपायों पर चर्चा की।

दूसरी तरफ, राज्य अतिथि गृह 'ताराघर' में हुई मेघालय जलवायु परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ने अल-नीनो के कारण मौसम में होने वाले बदलावों और सूखे जैसी चुनौतियों से निपटने की रणनीति की समीक्षा की। इस बैठक में मौसम विभाग, कृषि, स्वास्थ्य और जल संसाधन विभागों के विशेषज्ञ शामिल हुए।

आमतौर पर अल-नीनो के कारण मॉनसून कमजोर पड़ता है, जिससे कम बारिश, लंबा सूखा और खेती एवं पानी का संकट पैदा होता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि अल-नीनो का असर दिखने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने सभी विभागों को जिम्मेदारी और समय सीमा तय करते हुए अपनी योजनाओं को तुरंत जमीन पर उतारने के निर्देश दिए।

जलवायु परिषद ने बैठक में राज्य भर में बारिश के रुख, भूजल के स्तर, मिट्टी की नमी और पानी के संकट वाले इलाकों की एक 'मैपिंग रिपोर्ट' पेश की। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हालांकि इतिहास में हर बार अल -नीनो का मेघालय पर बुरा असर नहीं पड़ा है, फिर भी बदलते मौसम को देखते हुए लगातार निगरानी रखना जरूरी है।

श्री संगमा ने जल संकट से निपटने के लिए मिट्टी और जल संरक्षण की चल रही परियोजनाओं में तेजी लाने और अगले छह से 12 महीनों के भीतर पूरे होने वाले व्यावहारिक उपायों को लागू करने को कहा। उन्होंने सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक सुविधाओं में भी बिजली और पानी की बर्बादी रोकने के उपायों की समीक्षा की।

दोनों ही मामलों में मुख्यमंत्री ने जनभागीदारी और जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बताया। छतों पर सोलर पैनल को बढ़ावा देने और ऊर्जा संरक्षण के लिए उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और युवा समूहों को जोड़ने का सुझाव दिया।

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