भोपाल , जुलाई 27 -- किसान नेता केदार शंकर सिरोही ने मध्यप्रदेश की उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराने तथा पिछले 20 वर्षों के उर्वरक वितरण का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

श्री सिरोही ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले लगभग दो दशकों से उर्वरक वितरण व्यवस्था का संचालन मुख्य रूप से एक ही अधिकारी के माध्यम से होता रहा है और सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें संविदा व्यवस्था के तहत इस जिम्मेदारी पर बनाए रखा गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कृषि विभाग में ऐसा कोई अन्य सक्षम अधिकारी नहीं है जो इस दायित्व का निर्वहन कर सके तथा क्या पिछले 20 वर्षों में किसी वैकल्पिक व्यवस्था या उत्तराधिकारी को तैयार नहीं किया गया। उनका कहना था कि किसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का एक व्यक्ति पर निर्भर रहना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं है।

किसान नेता ने आरोप लगाया कि उर्वरक वितरण में कृत्रिम कमी, जिलों के बीच असंतुलित आपूर्ति, कालाबाजारी तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के लिए विशेष समिति गठित करने तथा पिछले 20 वर्षों के उर्वरक वितरण की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराने की भी मांग की। साथ ही विभिन्न जिलों से सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं अन्य उर्वरकों के नमूनों की स्वतंत्र प्रयोगशाला से जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की बात कही।

श्री सिरोही ने प्रदेश में लागू ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उर्वरक आवश्यकता अलग-अलग होती है। इसलिए इस व्यवस्था में कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।

उन्होंने सिंगल सुपर फॉस्फेट के वितरण और सब्सिडी व्यवस्था की स्वतंत्र फोरेंसिक एवं वित्तीय जांच कराने की भी मांग की। किसान नेता ने सरकार से उर्वरक वितरण व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच, पिछले 20 वर्षों का श्वेत पत्र जारी करने, संविदा पर नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों की समीक्षा, उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का ऑडिट, ई-टोकन प्रणाली की वैज्ञानिक समीक्षा तथा वितरण प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

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