नयी दिल्ली , जनवरी 30 -- केंद्र सरकार ने उर्वरक ढुलाई के मामले में मील का पत्थर हासिल करते हुए एक नया रिकार्ड बनाया है। देश में उर्वरक ढुलाई इतिहास में पहली बार 500 लाख टन के आंकड़े को पार कर गई है।
उर्वरक मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की है। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अप्रैल से दिसंबर तक कुल आपूर्ति 530.16 लाख टन तक पहुँच गई, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12.2 प्रतिशत अधिक है। यह रिकॉर्ड वृद्धि से संकेत मिलता है कि देश में कृषि क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है।
इसमें कहा गया है कि इस सफलता के पीछे रेल मंत्रालय और उर्वरक विभाग के बीच का अभूतपूर्व तालमेल रहा है। खरीफ और रबी सीजन के दौरान रेलवे ने उर्वरक रेकों की तेज आवाजाही सुनिश्चित की। मंत्रालय की जारी एक विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि रेलवे से मिले इस सहयोग की वजह से वह देश के हर कोने तक पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने में सफल हो सका। विभाग का यह भी मानना है इस समन्वय की वजह से खाद्य सुरक्षा को लेकर भारत सरकार का संकल्प नई ऊंचाई पर पहुंच गया। उर्वरक रेकों की तेज और सुचारु आवाजाही से राज्यों तक समय पर आपूर्ति की गई, जिससे खेती के अहम दौर में किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ा।
इस अवधि में सभी राज्यों में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। यूरिया की 312.40 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले 350.45 लाख टन की उपलब्धता कराई गई।
मंत्रालय ने कहा है कि जुलाई 2025 में जहाँ प्रतिदिन औसतन 72 रेक की लोडिंग हो रही थी, वह सितंबर में बढ़कर 80 रेक प्रतिदिन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई। पिछले पाँच खरीफ सत्रों में यह लोडिंग का सबसे शानदार प्रदर्शन रहा है।
इसी तरह प्रमुख पी एवं के उर्वरकों (जैसे डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस) की आवश्यकता 252.81 लाख टन के मुकाबले 287.69 लाख टन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
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