पटना , जनवरी 30 -- बिहार में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिये कृषि विभाग ने जनवरी माह के दौरान राज्य के 16 जिलों में 41 उर्वरक विक्रेताओं (प्रतिष्ठानों) के लाइसेंस रद्द कर दिये हैं।

इस संबंध में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया है कि राज्य सरकार उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य पर बिक्री को रोकने के लिये पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उर्वरकों की उपलब्धता और मूल्य पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिये पूरे राज्य में लगातार छापामारी अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार, 30 जनवरी तक राज्य में 1.71 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.64 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.10 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.44 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 1.06 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

कृषि मंत्री श्री यादव ने बताया कि रबी 2025- 26 सीजन के दौरान अब तक 41 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जबकि कुल 118 उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किये गये हैं। उर्वरक प्रतिष्ठानों पर नियमित निरीक्षण और छापामारी के लिये मुख्यालय स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है, जो शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई कर रहा है।

कृषि मंत्री श्री यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रखंडवार उर्वरकों का उप- आवंटन किसानों की वास्तविक आवश्यकता और क्षेत्रीय आच्छादन के अनुसार सुनिश्चित किया जाये। साथ ही उर्वरक दुकानों पर प्रदर्शित मात्रा और भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरकों का नियमित सत्यापन किया जाये। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाये जाने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये गये हैं।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में विशेष सतर्कता बरतते हुये सशस्त्र सीमा बल के साथ समन्वय स्थापित कर छापामारी अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने किसानों से अपील की है कि किसी भी अनियमितता की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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