चेन्नई , अप्रैल 23 -- निन्यानवे साल की उम्र होने के बावजूद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पूर्व मंत्री एवं भारतीय राजनीति के वयोवृद्ध नेता डॉ. एच.वी. हांडे गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में वोट डालने के लिए खुद चलकर मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उनके इस कदम की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सराहना की है।

डॉ. हांडे ने अन्ना द्रमुक के शासन के दौरान एमजीआर मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य किया था। वह चेन्नई के 'थाउज़ेंड लाइट्स' निर्वाचन क्षेत्र में स्थित मतदान केंद्र पहुँचे। वे प्रवेश द्वार से लेकर मतदान कक्ष तक खुद चलकर गए और अपना वोट डाला। डॉ. हांडे 1999 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक संदेश में कहा, " मतदान न केवल हमारा अधिकार है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ज़िम्मेदारी भी है।"वोट डालने के बाद अपनी बाईं तर्जनी उंगली पर लगी अमिट स्याही का निशान दिखाते हुए एक तस्वीर साझा करते हुए, डॉ. हांडे ने लिखा, "99 साल की उम्र में मैंने आज, मैंने अपनी आवाज़ का इस्तेमाल किया।" उन्होंने कहा, "मैंने पहली बार 1946 में एक मेडिकल छात्र के रूप में वोट दिया था। मतदान न केवल एक अधिकार है, बल्कि यह उस भविष्य के प्रति एक ज़िम्मेदारी भी है जिसे हम अपने पीछे छोड़ जाते हैं।"डॉ. हांडे पाँच बार विधायक रहे और सी. राजगोपालाचारी (जिन्हें लोकप्रिय रूप से 'राजाजी' कहा जाता था) तथा एमजीआर के करीबी सहयोगी थे। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम से अलग होने के बाद एमजीआर द्वारा अन्ना द्रमुक की स्थापना किए जाने पर डॉ. हांडे उसके पहले उप महासचिव बने थे। डॉ. हांडे, ने 1980 से 1986 के बीच एमजीआर के दूसरे और तीसरे मंत्रिमंडल में दो कार्यकाल तक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कार्य किया था। उन्होंने कहा, "आपका एक वोट मायने रखता है। बाहर निकलें। खड़े हों। अपनी गिनती करवाएँ।"वहीं, डॉ. हांडे की पोस्ट को साझा करते हुए श्री मोदी ने 'एक्स ' पर लिखा, "एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश! मेरा मानना है कि युवा लोग बड़ी संख्या में मतदान करेंगे और हमारे लोकतंत्र को मज़बूत करेंगे।"प्रतिष्ठित डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार से सम्मानित डॉ. हांडे को तमिलनाडु में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बदलने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने शिशु मृत्यु दर को कम करने, कुष्ठ रोग से लड़ने और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में सुधार करने जैसे काम किए। इसके अलावा, 1986 में वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में हुए एक अध्ययन में जब भारत में एचआईवी/एड्स का पहला मामला सामने आया, तो उसकी घोषणा करने का श्रेय भी उन्हीं को दिया जाता है।

वर्ष 1987 में एमजीआर के निधन के बाद वे सक्रिय विधायी राजनीति से दूर रहे। बाद में, 1999 में वह भाजपा में शामिल हो गए, 2004 में राष्ट्रीय परिषद के सदस्य बने और 2006 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर अन्ना नगर से चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

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