धर्मस्थल , मई 31 -- उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने रविवार को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्थंगडी में 'सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क' का उद्घाटन किया और इसे महिलाओं के नेतृत्व वाले सामाजिक परिवर्तन और समावेशी विकास का एक मॉडल बताया, जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। 'सिरी' की ओर से स्थापित इस औद्योगिक पार्क का उद्घाटन धर्मस्थल से किया गया। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, राज्यसभा सांसद और सिरी अध्यक्ष डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े, लोकसभा सांसद बृजेश चौटा और सिरी की संस्थापक हेमवती वी. हेगड़े भी मौजूद थीं।

इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि 'सिरी' जैसी संस्थाएं यह दर्शाती हैं कि ग्रामीण भारत उद्यमशीलता, आजीविका सृजन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कैसे समृद्धि हासिल कर सकता है।"उन्होंने कहा, " विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा आत्मनिर्भरता और ग्रामीण सशक्तीकरण पर आधारित होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास ऐसा होना चाहिए, जो समाज के सभी वर्गों में सम्मान, अवसर और विश्वास पैदा करे। 'सिरी' की उपलब्धियों पर उन्होंने कहा कि यह संगठन सीधे तौर पर 3,000 से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक व्यक्तियों को लाभ पहुंचाता है। इनमें से अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाएं हैं। इस पहल को 'सही मायने में सामाजिक परिवर्तन' बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान सशक्तीकरण और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए एक उत्प्रेरक बन गया है।

उप राष्ट्रपति ने सामाजिक विकास में दशकों लंबे योगदान के लिए डॉ डी वीरेंद्र हेगड़े की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि डॉ हेगड़े ने पिछले लगभग 60 वर्षों से यह दिखाया है कि कैसे आध्यात्मिकता का उपयोग रचनात्मक सामाजिक परिवर्तन की एक शक्ति के रूप में किया जा सकता है।

उप राष्ट्रपति ने टिप्पणी की, " उनका जीवन अपने आप में समाज के लिए संदेश है। "उन्होंने महिला सशक्तीकरण और समाज कल्याण की पहलों को आगे बढ़ाने में हेमवती वी हेगड़े की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक मिशन की सफलता परिवार के सदस्यों की प्रतिबद्धता और समर्थन से मजबूत होती है।

नवनिर्मित औद्योगिक पार्क की सराहना करते हुए श्री राधाकृष्णन ने इसके कर्मचारी-अनुकूल बुनियादी ढांचे की भी चर्चा की, जिसमें महिला श्रमिकों के लिए हॉस्टल की सुविधा, आवासीय क्वार्टर, डे-केयर, स्वच्छ रसोई, परिवहन सेवाएं और कल्याणकारी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना औद्योगिक विकास के प्रति एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय अभियान का जिक्र करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के सिद्धांतों को भारत की आर्थिक प्रगति का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्होंने 'सिरी' को एक ऐसा मॉडल बताया, जिसे पूरे देश में दोहराया जाना चाहिए, जो यह साबित करता है कि उद्योग सामाजिक रूप से जिम्मेदार, पर्यावरण के प्रति जागरूक और मानव कल्याण पर केंद्रित हो सकता है।

उप राष्ट्रपति ने धार्मिक सद्भाव और आपसी सम्मान की भारत की परंपरा को बनाये रखने पर भी जोर दिया। क्षेत्र धर्मस्थल की विरासत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह सदियों पुरानी संस्था सह-अस्तित्व, सेवा और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में खड़ी है।

उन्होंने कहा, " भारतीय सभ्यता ने हमेशा सभी पंथों का सम्मान किया है। "उन्होंने कहा कि भक्ति और आध्यात्मिकता, चाहे वह किसी भी धर्म की हो, सामाजिक सद्भाव और नैतिक शक्ति में योगदान देती है।

धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर जोर देते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि सभी धर्मों के साथ समान सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए, जबकि किसी भी रूप में जबरन धर्म परिवर्तन को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

इससे पहले दिन में उप राष्ट्रपति ने धर्मस्थल के श्री मंजूनाथ स्वामी मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। उन्होंने अन्नपूर्णा प्रसाद निलय का भी दौरा किया, श्रद्धालुओं से बातचीत की और मंदिर की सामुदायिक सेवा और मुफ्त सामूहिक भोजन की पुरानी परंपरा की सराहना करते हुए इसे करुणा, समानता और भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि धर्मस्थल और 'सिरी' जैसी संस्थाएं यह दर्शाती हैं कि राष्ट्र के लिए सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक मूल्य और आर्थिक विकास किस प्रकार मिलकर काम कर सकते हैं।

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