श्रीनगर , जनवरी 13 -- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कथित आतंकी संबंधों के आरोप में मंगलवार को पांच सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

इन पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्त किये जाने के साथ संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की कुल संख्या 87 हो गई है। यह प्रावधान उपराज्यपाल को बिना किसी विभागीय जांच के या कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगे बिना सेवा समाप्त करने की अनुमति देता है।

बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में मोहम्मद इश्फाक (शिक्षक), तारीक अहमद शाह (प्रयोगशाला तकनीशियन), बशीर अहमद मीर (सहायक लाइनमैन), फारूक अहमद भट (वन विभाग में फील्ड वर्कर) और मोहम्मद यूसुफ (स्वास्थ्य विभाग में चालक) शामिल हैं।

सरकार द्वारा अनौपचारिक रूप से प्रसारित एक डोजियर के अनुसार, मोहम्मद इश्फाक की नियुक्ति स्कूल शिक्षा विभाग में रेहबर-ए-तालीम के रूप में हुई थी और बाद में वर्ष 2013 में उन्हें शिक्षक के रूप में नियमित किया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इश्फाक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था और वह लश्कर के कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के नियमित संपर्क में था, जिसे भारत सरकार ने नामित आतंकवादी घोषित किया है और जो पाकिस्तान से संचालित हो रहा है। इश्फाक को अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

डोजियर में कहा गया है कि तारिक अहमद शाह को वर्ष 2011 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था और 2016 में उनकी सेवा की पुष्टि हुई। अधिकारियों के अनुसार, वह कम उम्र से ही हिज्बुल मुजाहिदीन (एचएम) के प्रभाव में आ गया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि 2005 में अमीन बाबा (जो उसका रिश्तेदार है) के पाकिस्तान भागने की जांच के दौरान, राज्य जांच एजेंसी की पड़ताल में तारिक के संबंध उजागर हुए।

जांच में कथित तौर पर सामने आया कि तारिक ने अमीन बाबा को अनंतनाग में ठहराने में मदद की और बाद में उसे अटारी-वाघा सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था की, जिससे उसके पाकिस्तान भागने में सहायता मिली।

डोजियर के अनुसार, बशीर अहमद मीर ने 1988 में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में नौकरी जॉइन की थी और 1996 में नियमित किया गया। जांचकर्ताओं का कहना है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद बशीर बांदीपोरा के गुरेज क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय कार्यकर्ता बन गया था। इसी तरह के आरोप फारूक अहमद भट और मोहम्मद यूसुफ पर भी लगाए गए हैं।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि फारूक अहमद भट हिज्बुल मुजाहिदीन से सक्रिय रूप से जुड़ गया था और संगठन से जुड़े एक पूर्व विधायक के अनौपचारिक निजी सहायक के रूप में काम करता था। उस पर हिज्बुल कमांडर अमीन बाबा को पाकिस्तान भगाने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद करने का आरोप है। आरोप है कि उसने अपनी सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सुरक्षा जांच से बचने में मदद की और पूर्व विधायक द्वारा उपलब्ध कराए गए सरकारी वाहन का उपयोग किया गया।

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