मुंबई , जनवरी 25 -- शिवसेना के वरिष्ठ नेता सांसद संजय निरुपम ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सम्मान में आयोजित एक अभिनंदन समारोह में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की उपस्थिति का बचाव किया है।
श्री निरुपम ने कहा कि उनकी उपस्थिति पूरी तरह से राज्य प्रोटोकॉल और संवैधानिक जिम्मेदारी से प्रेरित थी, न कि राजनीतिक कारणों से। मुख्यमंत्री उस समय शहर में मौजूद नहीं थे, इसलिए स्थापित प्रशासनिक मानदंडों को ध्यान में रखते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए।
यह समारोह 25 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की मुंबई यात्रा के दौरान बॉम्बे उच्च न्यायालय में आयोजित किया गया था।
श्री निरुपम ने विपक्षी दलों की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करना और उचित आतिथ्य सुनिश्चित करना संवैधानिक शिष्टाचार और संस्थागत सम्मान का विषय है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे अवसर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से परे गरिमा की मांग करते हैं और इन्हें पक्षपातपूर्ण नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
शिवसेना नेता ने उन विपक्षी नेताओं की कड़ी आलोचना की जिन्होंने इस कार्यक्रम में श्री शिंदे और श्री पवार की मौजूदगी पर सवाल उठाए थे, विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय में लंबित शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रांकापा) के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े मामलों के संदर्भ में।
श्री निरुपम ने कहा कि केवल इसलिए न्यायिक शिष्टाचार को उपेक्षित नहीं किया जा सकता क्योंकि राजनीतिक विवाद अदालत में विचाराधीन हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस आधार पर 'बुनियादी संस्थागत सम्मान' से समझौता किया जाना चाहिए? उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी बातचीत के संबंध में कोई नैतिक या कानूनी चिंता होती, तो स्वयं उच्चतम न्यायालय ने इस पर स्पष्ट निर्देश जारी किए होते।
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