सहारनपुर , जुलाई 13 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल दिखाई देने लगी है। गैर-भाजपाई दलों के बीच संभावित गठबंधनों, नए राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद तेज हो गई है। फिलहाल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना प्रबल मानी जा रही है, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपने दरवाजे गठबंधन के लिए खुले होने की बात कही है। सहारनपुर दौरे पर पहुंचे सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और अपने स्तर पर दलित उत्पीड़न के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता पीड़ितों के साथ खड़ा होना और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ना है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सहारनपुर मंडल की तीनों लोकसभा सीटों पर भाजपा की हार ने विपक्षी दलों को नई ऊर्जा दी है। सहारनपुर से कांग्रेस नेता इमरान मसूद, कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन तथा मुजफ्फरनगर से सपा के हरेंद्र मलिक की जीत ने क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण स्थापित किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम, दलित और कुछ वर्गों में राजपूत समुदाय की नाराजगी ने विपक्ष को लाभ पहुंचाया था। हालांकि, विधानसभा चुनाव की परिस्थितियां और राजनीतिक समीकरण अलग होते हैं और उनमें तेजी से बदलाव भी देखने को मिल रहा है।
सपा नेतृत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सतर्क नजर आ रहा है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवा सांसद इकरा हसन को पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत सक्रिय भूमिका में आगे बढ़ाया है। इकरा हसन क्षेत्र में दलितों और पिछड़ों से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाने के साथ-साथ उत्पीड़न की घटनाओं में पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी सहायता और राजनीतिक समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही हैं।
उधर, इमरान मसूद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न विधानसभा सीटों पर अपने समर्थक नेताओं को तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पूर्व विधायक मसूद अख्तर, विधान परिषद सदस्य शाहनवाज खान सहित कई प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं की सक्रियता को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की रणनीति, इमरान मसूद की सक्रियता और दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की संभावित भूमिका आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मिशन यूपी-2027 की सियासी बिसात पर आने वाले समय में नए गठबंधन और नए समीकरण उभरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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