विद्या शंकर रायलखनऊ , दिसंबर 8 -- उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने की प्रक्रिया तेज हो गई है और पार्टी नेतृत्व के भीतर संभावित विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस बार भी "पुराने चेहरे" पर दांव खेल सकती है, हालांकि किसी नए या अप्रत्याशित नाम की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पिछले दो विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केशव प्रसाद मौर्य (2017) और स्वतंत्र देव सिंह (2022) को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। दोनों ओबीसी समुदाय से आते हैं। दोनों ही मौकों पर भाजपा को भारी सफलता मिली थी।
पदाधिकारी ने बताया, " पार्टी की राज्य इकाई में ओबीसी नेतृत्व की जरूरत तब और उभरी जब 2016 में केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाया गया। 2017 के चुनावों में भाजपा ने रिकॉर्ड 312 सीटें जीतकर मौर्य को पार्टी का प्रमुख ओबीसी चेहरा स्थापित कर दिया। इसकी वजह से गैर-यादव ओबीसी, विशेषकर कुर्मी समुदाय, लंबे समय तक भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा रहा।"भाजपा सूत्रों के मुताबिक़ मौर्य को हाल के दिनों में जिस तरह से लगातार महत्व मिल रहा है उससे कई तरह की अटकलें पार्टी के भीतर चल रही हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में सह-प्रभारी की जिम्मेदारी देना और बिहार विधानसभा चुनाव के बाद विधायक दल का पर्यवेक्षक नियुक्त करना शामिल है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में कई ओबीसी उपजातियों खासकर कुर्मी का भाजपा से दूर जाना और विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर झुकाव पार्टी के लिए बड़ा झटका रहा। 2019 के मुकाबले भाजपा का सीट आंकड़ा 62 से घटकर 33 पर आ गया।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने यूनिवार्ता से कहा कि इसकी एक वजह यह भी है कि ओबीसी नेतृत्व को समय रहते मजबूत न किए जाने और संगठनात्मक स्तर पर कई कमियों के चलते परंपरागत ओबीसी वोटों में गिरावट आई है।
पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, संभावित नामों में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा शामिल हैं, जिन्होंने ओबीसी नेतृत्व के तौर पर अपनी पहचान स्थापित की है। साथ ही यह भी चर्चा है कि पार्टी ऊपर के किसी "सवर्ण चेहरे" को भी पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं कर रही। इस सूची में बस्ती से भाजपा सांसद हरीश द्विवेदी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा के नाम बताए जा रहे हैं।
पार्टी के एक नेता ने कहा, " बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और 2027 की तैयारी को देखते हुए किसी अनुभवी ओबीसी नेता को आगे लाना संगठन के लिए तुरंत प्रभावी और सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व शैली को देखते हुए "सरप्राइज़ अध्यक्ष " की नियुक्ति की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने केवल इतना कहा कि भाजपा आलाकमान सही समय आने पर सही फैसला लेगा।
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