लखनऊ , सितंबर 8 -- उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच अंतरराज्यीय बस सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। सीमावर्ती जिलों समेत दोनों राज्यों के यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दोनों राज्यों के बीच बस सेवाओं के विस्तार, नए मार्गों के निर्धारण और किराये में एकरूपता समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत के बीच गत दिवस हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में वर्ष 2016 से प्रभावी उत्तर प्रदेश-बिहार अंतरराज्यीय परिवहन करार और मई 2026 में हुए इसके विस्तार के तहत निर्धारित 25 मार्गों पर बस संचालन की स्थिति की समीक्षा की गई।
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने बिहार के विभिन्न जिलों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लिए नई बस सेवाएं शुरू करने का प्रस्ताव रखा। दोनों राज्यों के बीच हाल के वर्षों में विकसित नए राजमार्गों और सड़क मार्गों को भी बस सेवा नेटवर्क से जोड़ने पर सहमति बनी।
प्रस्तावित नए मार्गों का मानचित्र समेत विस्तृत विवरण बिहार सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके आधार पर मार्गों का परीक्षण कर बस संचालन शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए दूसरे चरण की बैठक जल्द आयोजित करने पर सहमति बनी है।
बैठक में यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए दोनों राज्यों की बस सेवाओं के किराये में एकरूपता लाने पर भी सहमति बनी। समान दूरी वाले मार्गों का दोबारा परीक्षण कर किलोमीटर के आधार पर परिवहन करार करने पर विचार किया गया। बिहार सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के संचालन में किसी तरह की बाधा या असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
दोनों राज्यों के परिवहन विभाग और परिवहन निगम के अधिकारी प्रस्तावित मार्गों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेंगे। इससे खासकर सीमावर्ती जिलों के यात्रियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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