नोएडा , अप्रैल 03 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल और दादरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एक युवक से करीब इकहत्तर हजार रुपये की रिश्वत लेकर उसकी फर्जी मेडिकल लीगल रिपोर्ट तैयार की।

मामले में एक्स-रे टेक्नीशियन का रिश्वत लेते हुए वीडियो भी सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी मेधा रूपम के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस ने आरोपित एक्स-रे टेक्नीशियन को रेडियोलॉजी विभाग से हटाकर अस्पताल से बाहर कर दिया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने शुक्रवार को बताया गया कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शुभ्र मित्तल, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज त्रिपाठी और डॉ. आरपी को शामिल किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दादरी सीएचसी और जिला अस्पताल में पैसे लेकर झूठी मेडिकल लीगल रिपोर्ट बनाई जाती है। इस दावे की पुष्टि के लिए वह स्वयं सीएचसी दादरी पहुंचे और बिना किसी चोट के मेडिकल रिपोर्ट बनवाने की बात कही। काफी बातचीत के बाद ग्यारह हजार रुपये में सौदा तय हुआ, लेकिन पूरी रकम न देने पर कर्मचारी रिपोर्ट बनाने के लिए तैयार नहीं हुए।

रिश्वत देने के बाद वह जिला अस्पताल पहुंचे, जहां पसली में हेयरलाइन फ्रैक्चर और कान में ट्रामैटिक पर्पोरेशन जैसी झूठी चोटों की रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया। यहां रेडियोलॉजी विभाग में एक्स-रे कराने के नाम पर तीस हजार रुपये लिए गए। आरोप है कि कान की रिपोर्ट के लिए भी अलग से तीस हजार रुपये वसूले गए। इस दौरान एक चिकित्सक ने भी पैसों के लेन-देन की पुष्टि की।

जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि जांच में एक्स-रे टेक्नीशियन रिश्वत लेते हुए वीडियो में कैद मिला है। इसके बाद उसे तत्काल प्रभाव से अस्पताल से बाहर कर दिया गया है। अन्य कर्मचारियों को भी सख्त चेतावनी दी गई है कि मरीजों से किसी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि संबंधित चिकित्सक पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

दादरी सीएचसी में भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। जनवरी 2026 में बिसरख निवासी डॉ. पवन कुमार चौधरी ने भी आरोप लगाया था कि जांच के नाम पर उनसे बारह हजार रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने पांच हजार रुपये उधार लेकर दिए, जबकि बाकी रकम देने का दबाव बनाया गया।

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