लखनऊ , मार्च 11 -- उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बुधवार सुबह अचानक धुंध और कोहरे की मोटी परत छा गई, जिससे धूप लगभग लुप्त हो गई और कई जगहों पर दृश्यता काफी कम हो गई।
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, वाराणसी, मिर्ज़ापुर, मेरठ और आगरा समेत कई जिलों में लोगों को धुंध का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार धुंध की वजह से कुछ स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गयी। प्रयागराज में यह करीब 30 मीटर, मेरठ में 100 मीटर और वाराणसी एयरपोर्ट पर लगभग 500 मीटर तक रह गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में इस तरह की स्थिति पहले भी 2008 में देखने को मिली थी।
लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मनीष कुमार ने बताया कि नम पूर्वी हवाओं से आई नमी की वजह से दिन के समय भी प्रदेश के कई हिस्सों में धुंध और कोहरा बना रहा।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति अगले दो दिनों तक जारी रह सकती है। वहीं अगले 4-5 दिनों तक तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, जिससे गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि 15 मार्च के आसपास हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक दिन में तेज़ गर्मी और रात में अपेक्षाकृत ठंडे मौसम के कारण रेडिएशन फॉग की स्थिति बन रही है। इस प्रक्रिया में हवा में मौजूद नमी रात के समय जमीन के पास छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि शांत हवाएं इस धुंध को लंबे समय तक बनाए रखती हैं, जबकि हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कण नमी को जमने में मदद करते हैं, जिससे सुबह के समय धुंध और कोहरा जैसा मौसम बन जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, सोनभद्र, मिर्ज़ापुर और गाजीपुर के बाहरी इलाकों में भी मंगलवार सुबह से धुंध छाई रही।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के अनुसार पश्चिमी हवाओं और हवा में बढ़ी नमी की वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के पीलीभीत, लखीमपुर-खीरी और बहराइच जैसे जिलों में भी धुंध देखी गई।
वहीं बुंदेलखंड के हमीरपुर, ओराई, बांदा और महोबा समेत कई इलाकों में सुबह करीब 9 बजे तक घनी धुंध बनी रही और विजिबिलिटी कुछ मीटर तक सीमित हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते पैटर्न भी इस तरह की असामान्य परिस्थितियों के पीछे एक कारण हो सकते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित