लखनऊ , जनवरी 30 -- उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि फाइलेरिया और कालाजार जैसी उपेक्षित बीमारियों का उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि आगामी 10 फरवरी से शुरू हो रहे निर्णायक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान में स्वयं दवा लें और अपने परिवार के सभी सदस्यों को भी दवा जरूर खिलाएं।

शुक्रवार को नेगलेक्टेड ट्रापिकल डिजीज (एनटीडी) दिवस के अवसर पर पीसीआई के सहयोग से लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि फाइलेरिया मच्छर जनित बीमारी है, जिसका स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है।

मयंकेश्वर शरण सिंह ने बताया कि आईडीए अभियान की सफलता में स्वयंसेवकों की भूमिका अहम है। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली भी निकाली और उपस्थित लोगों को दवा सेवन की शपथ दिलाई गई।

अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने कहा कि उपेक्षित बीमारियों को समाप्त करना किसी एक विभाग के बस की बात नहीं है। इसके लिए अंतरविभागीय समन्वय और समुदाय की सहभागिता जरूरी है तथा प्रत्येक बीमारी के लिए अलग रणनीति अपनानी होगी।

विधायक डॉ. नीरज बोरा ने बताया कि प्रदेश में फाइलेरिया 51 जिलों के 782 ब्लॉकों से सिमटकर अब 21 जिलों के 64 ब्लॉकों तक आ गया है, जो स्वास्थ्य विभाग के संगठित प्रयासों का परिणाम है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित